डेहरी : पुलिस के जवानों को दक्ष बनाने के लिए अखिल भारतीय स्तर पर पुलिस शूटिंग प्रतियोगिता का आयोजन हर वर्ष होता है. वर्ष 1953 में पहली बार नागपुर में इसका आयोजन हुआ था.
जो क्रमश: अन्य स्थानों पर होते हुए इस वर्ष डेहरी के बीएमपी टू के मैदान में हो रहा है. इस प्रतियोगिता का उद्देश्य है, जवानों में प्रतियोगी भावना को बढ़ाते हुए उन्हें दक्ष करने का. उक्त बातें पुलिस कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन पीएस ढिल्लो ने मंगलवार को बीएमपी दो परिसर में आयोजित 20वीं ऑल इंडिया पुलिस शूटिंग प्रतियोगिता के दौरान प्रेस वार्ता में कही.
उन्होंने कहा कि शुरुआत के दिनों में राइफल्स कंपीटीशन से शूटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता था. वर्ष 1998 में प्रतियोगिता का लीड सीआरपीएफ करती थी, लेकिन धीरे-धीरे आयोजन को बड़ा किया गया और अब पिस्टल व कार्बाइन भी प्रतियोगिता में शामिल होने लगे.
देश के खिलाफ काम करने वालों को टारगेट करने के लिए ऐसी प्रतियोगिता का आयोजन कर जवानों को दक्ष बनाया जाता है. उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में पिस्टल से छह सेकंड में पांच गोलियां दागनी पड़ती हैं. पूर्व में अर्धसैनिक बल और राज्य पुलिस को मिलाकर संयुक्त रूप से मेडल मिलता था.
हाल के दिनों में बेस्ट स्टेट चैंपियनशिप की श्रेणी को भी शामिल किया गया है. वर्ल्ड पुलिस शूटिंग कंपीटीशन में भी भारतीय जवानों ने खिताब जीता है. उन्होंने कहा कि शूटिंग ऐसा स्पोर्ट्स है, जिसमें भारत ने सबसे अधिक ओलिंपिक मेडल जीता है.
बीएमजी परवेज अख्तर ने कहा कि मैं 4 वर्ष पूर्व डेहरी बीएमपी दो के कमांडेंट रहते पहली बार इस तरह की प्रतियोगिता में बिहार टीम को लीड किया था. तब से अब तक बिहार की टीम ने कई मेडल जीते हैं. दो वर्ष पूर्व मैंने पुलिस कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन से अनुरोध किया था कि ऑल इंडिया पुलिस कंपीटीशन बिहार में हो और विशेषकर डेहरी ऑन सोन के बीएमपी टू में हो. प्रयास सफल रहा. बीएमपी दो का बट रेंज देश में तीसरे स्थान पर है. यहां की व्यवस्था काबिले तारीफ है.
