सासाराम : बेटे की करतूत से जेल में बंद पिता की चली गयी जान

विशुनपुरा के 80 वर्षीय श्रीभगवान सिंह की जेल में बिगड़ी हालत, सदर अस्पताल में मौत शराब तस्करी के आरोप में 29 मई को पुलिस ने किया था गिरफ्तार सासाराम नगर : बेटे की कारस्तानी ने मंगलवार को जेल में बंद वृद्ध पिता की जान ले ली. मामला शराब के धंधे से जुड़ा है. नोखा थाना […]

विशुनपुरा के 80 वर्षीय श्रीभगवान सिंह की जेल में बिगड़ी हालत, सदर अस्पताल में मौत
शराब तस्करी के आरोप में 29 मई को पुलिस ने किया था गिरफ्तार
सासाराम नगर : बेटे की कारस्तानी ने मंगलवार को जेल में बंद वृद्ध पिता की जान ले ली. मामला शराब के धंधे से जुड़ा है. नोखा थाना क्षेत्र के विशुनपुर निवासी श्रीभगवान सिंह (80) को पुलिस शराब तस्करी मामले में 29 अप्रैल, 2017 को गिरफ्तार की थी. 30 अप्रैल, 2017 से ही वह जेल में बंद थे.
सोमवार को बंदी की तबीयत बिगड़ी. दिन भर जेल में इलाज होता रहा. स्थिति में सुधार नहीं होने पर जेल प्रशासन बंदी को मंगलवार की सुबह 3.20 बजे इलाज के लिए सदर अस्पताल ले आयी. जहां इलाज शुरू होते ही बंदी ने दम तोड़ दिया.
भारी मात्रा में बरामद हुई थी शराब
19 जुलाई 2016 को नोखा थाने की पुलिस ने गुप्त सूचना पर मृतक के मिल से बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब, गांजा व देशी शराब बरामद की थी. इस मामले में मृतक के बेटे रवींद्र सिंह को मुख्य आरोपित बनाया गया था.
हालांकि, छापेमारी की भनक लगते ही बेटा भाग निकला था. पुलिस मुख्य आरोपित के पिता को भी इस मामले से जोड़ दी. जबकि मृतक की उम्र 80 वर्ष थी. इन्हें चलने में भी परेशानी होती थी. अस्थमा से पीड़ित मृतक को पुलिस ने 29 अप्रैल को गिरफ्तार कर ली. मुख्य आरोपित बेटा रवींद्र सिंह सितंबर, 2016 में कोर्ट में सरेंडर किया और अभी जमानत पर जेल से बाहर है.
एक वर्ष तक जेल में बीमारी से जूझता रहा बंदी
श्रीभगवान सिंह एक वर्ष तक गंभीर बीमारी (अस्थमा) से जूझता रहा. इस एक वर्ष में शायद किसी दिन उसकी स्थिति ठीक रही हो. मृतक के एक रिश्तेदार धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि जब भी हम लोग उनसे जेल में मिलने जाते थे, वे हमें देख कर रोने लगते थे.
कहते थे मुझे जेल से निकालो, नहीं तो मैं मर जाऊंगा. पुलिस को भी नहीं दिखा कि क्या कोई इस उम्र में शराब की तस्करी कर सकता है. यदि बेटा गुनहगार है तो सजा भी बेटा को ही मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले महीने तबीयत ज्यादा बिगड़ गयी थी. बीमारी गंभीर थी, जेल प्रशासन ने उन्हें इलाज के लिए पटना भेजना चाहिए था. जो उसने नहीं किया.
अस्थमा की बीमारी थी हमेशा सांस लेने में होती थी परेशानी
बंदी की उम्र ज्यादा थी. उसको अस्थमा की बीमारी थी. हमेशा उनको सांस लेने में परेशानी होती थी. सोमवार की सुबह तबीयत बिगड़ी थी, शाम में स्थिति सामान्य हो गयी थी. रात में पुन: तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सदर अस्पताल भेजा गया. बंदी की मौत की बाद प्रक्रिया पूरी करने में समय लगता है.
संजीव कुमार, जेल अधीक्षक, मंडल कारा, सासाराम
12 घंटे तक अस्पताल में पड़ा रहा शव
मौत के 12 घंटे बाद तक बंदी का शव सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पड़ा रहा. परेशान परिजन अस्पताल से जेल तक की दौड़ लगाते रहे. बंदी की मंगलवार की सुबह 3:40 बजे मौत हुई थी. जेल प्रशासन को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने में 12 घंटे लग गये. शाम चार बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >