बिक्रमगंज : शहर से गुजरने वाली काव नदी में सिकरियां गांव के सामने पुल नहीं होने से यहां के लोग रेल पटरी होकर आने-जाने को विवश हैं. रेल पटरी होकर आने-जाने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. आम लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चे भी प्रतिदिन रेल पटरी होकर स्कूल जाते-आते हैं. गौरतलब हो कि सिकरियां बिक्रमगंज नगर पर्षद में है. सिकरियां और नगर के मुख्य बाजार के बीच से काव नदी गुजरती है. सिकरियां के लोगों का काव नदी पार कर नगर के मुख्य बाजार में आना होता है.
इस गांव से मुख्य बाजार तक कोई मार्ग नहीं है. लोग पगडंडी होकर काव नदी तक आते हैं और नदी पार कर बाजार पहुंचते है. गांव के लोगों द्वारा नदी पर अपने खर्च से बांस का चाचर बनाया जाता है. आरा सासाराम रेल खंड के निर्माण के बाद लोग चाचर के बजाय रेल के पटरी को ही आने-जाने का मार्ग बना लिया है. सिकरियां के लोग सब्जी का उत्पादन करते है, जिसे बेचने के लिये बाजार आना होता है. इसके अलावा यहां के सभी बच्चे बाजार में ही पढ़ने के लिये जाते हैं.
कुछ ट्रेनें विद्यालय खुलने के समय ही गुजरती है. इस रेल पटरी के सहारे सिकरिया गांव के अलावे आस-पास के गांव के लोग भी यात्रा करते हैं. इसमें अधिकतर स्कूली बच्चे ही होते हैं. बताया जाता है कि सिकरियां के लोगों ने नदी में पुल या फुटपाथ के निर्माण के लिये जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगायी. लेकिन किसी ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया.
क्या कहते हैं लोग
सिकरिया निवासी सत्यनाराण सिंह कहते हैं कि नदी में पुल नहीं होने के कारण जान जोखिम में डाल कर यात्रा करते हैं. सबसे अधिक परेशानी बरसात के समय जब नदी में पानी बढ़ जाता है. राजबल्लम सिंह कहते हैं कि गांव के सभी लोग सब्जी की खेती करते हैं और सब्जी बेचने के लिये प्रतिदिन बाजार जाना होता है. थाना चौक से होकर बाजार जाने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. जिसके कारण रेल पटरी होकर जाते है. राजू सिंह कहते है कि नदी में पुल हो जाता तो कोई अपनी जान जोखिम में डाल कर रेल पटरी से होकर नहीं जाता. पुल के निर्माण के लिये सांसद, विधायक और अधिकारियों से गुहार लगायी गयी, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है.
क्या कहते हैं अधिकारी
नदी में पुल या फुटपाथ के निर्माण में काफी राशि की आवश्यकता होगी. नगर पर्षद के पास वह राशि उपलब्ध होना संभव नहीं है. नदी में पुल के निर्माण के लिये सांसद या विधायक मद का उपयोग करना ही श्रेयस्कर होगा.
