सासाराम सदर. अपने-अपने बेटे की लंबी आयु के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत के माध्यम से बुधवार को माताएं निर्जला रहीं. शाम के स्नान करने के पश्चात जीवित्पूत्रिका पर्व संबंधित कथा सुनीं. प्रदोष काल में गाय के गोबर से आंगन को लिपने के बाद वही छोटा सा तालाब बना कर उसमें एक पाकड़ की डाल को खड़ा किया. जीमूतवाहकन की कुश निर्मित मूर्ति या जल या मिट्टी के बर्तन में स्थापित कर पीला व लाल रूई से उसे सजा कर धूप-दीप, चावल, फुल, माला आदि कई प्रकार की नैवेद्य से उसका पूजन किया. अपने वंश की स्मृति वृद्धि और प्रगति के लिए बास के पत्तों से पूजा अर्चना की. और जिउतिया व्रत ही कथा सुनीं.
कोचस : पुत्रों की लaबी उम्र के लिए क्षेत्र की माताओं ने निर्जला उपवास रखा. नगर पंचायत की चेयरमैन धर्मशीला देवी ने कहा कि उपवास रखने से पहले सभी मां बाजार से सब्जी में सप्तपुतिया, नोनी और चौराई का साग, मडुआ का आटा से बने लिट्टी आदि का भोजन करती हैं. इसके बाद शुद्व घी में ओठगन बनाती है और सूर्योदय होने से पूर्व ही उसे बच्चों को खिला देती है. वहीं पूर्व जिलापरिषद की उपाध्यक्ष व भाजपा प्रदेश नेता पूनम देवी बताती है कि उपवास के दिन सभी व्रतिका नदी आहर पोखर, पईन या कुआं पर स्नान करके नया वस्त्र धारण करती हैं.
नदी किनारे झूर में जियुत बंधन को रख चावल, फल और फूल चढाती है. उसी प्रसाद को उपवास तोड़ने के दिन ग्रहण करती है. हालांकि जो मां व्रत तोड़ने के निश्चिंत समय के बाद जितना ही विलंब करती हैं उतना ही उनके बच्चे की बलाय दूर होती है.
