डेहरी कार्यालय : शहर में प्रशासन द्वारा अतिक्रमण को हटाए जाने के बाद चौड़ी सड़क पर सरपट वाहन दौड़ाने के शहरवासियों के सपनों को बिजली विभाग का जोरदार करंेट लग गया. सडक पर मौजूद बिजली के खंभों व बीच सड़क पर लगे ट्रांसफर्मरों ने वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है.
उक्त खंभों पर झुल रहे जर्जर बिजली के तार से कभी भी किसी बड़े हादसे के होने से इंकार नहीं किया जा सकता है. उक्त खंभों से किसी वाहन के टकराने से घटने वाली दुर्घटना की भयावहता से विभाग आंख मुंदे बैठा है. बिजली विभाग उक्त खंभो के लगने के समय को सड़क बनने से पहले बता कर अपना पल्ला झाड रहा है.
बिजली विभाग के अधिकारी कहते है कि जब वहां पोल गड़ा होगा या ट्रासफर्मर लगा होगा, उस समय सडक पतली होगी. वहां बाद में सडक की चौडाई बढ़ायी गयी होगी. अगर उक्त बातों में सच्चाई है तो क्या पथ निर्माण विभाग की यह जिम्मेवारी नहीं बनती, की सड़क पर से उक्त खंभों को हटवाए. डेहरी बाजार, पाली रोड, स्टेशन रोड आदि जगहों पर सड़क के ऊपर गड़े खंभों के लिए आखिर जिम्मेवार बिजली विभाग है या पथ निर्माण विभाग.
क्या कहते हैं अधिकारी
विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता संजयकुमार शर्मा कहते है कि पथ निर्माण विभाग द्वारा अगर कहीं भी सड़क से पोल व ट्रांसफार्मर हटाने का प्रपोजल दिया जाता है उस पर नियमानुकूल कार्रवाई की जाएगी. व्यक्तिगत रूप से सडक पर लगाए गए ट्रांसफार्मर को हटाने के लिए संबंधित व्यक्ति से खर्च की राशि वसूली जायेगी.
कहां-कहां सडक पर हैं विद्युत खंभे
शहर के मुख्य बाजार में कामधेनु, कला निकेतन, सिनेमा रोड में खादी भण्डार, स्टेशन रोड में सुभाष नगर मोड, टहलानी भवन, बस स्टैन्ड आदि जगहों पर सड़क के ऊपर गाड़े गए बिजली के खम्भे व लगे ट्रांसफार्मर किसी बडे दुर्घटना को आमंत्रण देते दिखते है. सबसे खतरनाक स्थिति सुभाष नगर मोड, रहलानी भवन व कामधेनु के पास लगे ट्रांसफार्मरों की है.
हाल-फिलहाल के दिनों में स्टेशन रोड के रूद्राक्ष होटल के अगल-बगल गड़े बिजली के खंभों को भी सड़क के उपर ही गाड़े जाने का प्रमाण व मुख्य बाजार में प्राईवेट रूप से ट्रांसफार्मर लगाने वालों द्वारा सड़क का किया गया अतिक्रमण को देखने के बाद भी अधिकारीयों द्वारा किसी भी प्रकार का कोई कार्रवाई नहीं किया जाना लोगों की समझ में नहीं आ रहा है. अब आखिर अधिकारीयों को और कैसा प्रमाण चाहिए.
