जो सुंदर है वह किसी स्वयंसेवी संस्था या समाजसेवी की देन
सासाराम कार्यालय : किसी शहर की सुंदरता में उसके चौक-चौराहों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. सुंदर व सुसज्जित चौक-चौराहे लोगों को आकर्षित करते हैं. खुले व साफ-सुथरे चौराहों से राहगिरों को सुकुन मिलता है. लेकिन, अपने शहर में अब तक इस दिशा में क्या कदम उठाया गया है पता नहीं चलता है़ हां, इतना जरूर है कि किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी से इस पर बात करने पर योजना बनायी जाने या योजना होने की बात कहते हैं. लेकिन, जमीन पर अबतक किसी चौकों के सौंदर्यीकरण की योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी है. जो कुछ चौक कंक्रीट के बने दिखते हैं वे किसी स्वयंसेवी संस्था या निजी कंपनियों की देन है. हालात यह है कि अधिकतर चौकों पर अतिक्रमण का नजारा है. ठेला-खोमचे वाले चौकों को घेर चुके हैं, इसके कारण जाम की समस्या भी उत्पन्न हो रही है.
सौंदर्यीकरण के लिए वर्षों से हो रही बात: प्राय: डीएम व नगर पर्षद की सरकार के बदलने पर शहर के सौंदर्यीकरण की बात होती है. विधायक व मंत्री तक शहर के चौकों के सौंदर्यीकरण की बात कर चुके हैं. वर्ष 2014 व 2016 में गांधी स्मारक चौक के समीप की सड़क को चौड़ी कर स्मारक को बीच में लाने की बात भी हुई थी. लेकिन, मामला बात तक ही अटक गया. फाइल भी बनी या नहीं, बताने वाला कोई नहीं.
