डेहरी कार्यालय : शहर के पश्चिम बसे गरवट बिगहा, मनौरा, पहलेजा, चकिया आदि गांवों की सीमा पर कोयले को पकाने का अवैध काम होता है. कोयले को पकाने में उठने वाली आग की लपटें कभी भी शहर व आस-पास के इलाकों में बड़ी घटना का कारण बन सकती है. आग से भी ज्यादा खतरनाक पोड़ा बनाने के दौरान निकलने वाला जानलेवा धुआं है, जो पूरे क्षेत्र को प्रदूषित कर रहा है. पूरे क्षेत्र में वायु प्रदूषण से संकट गहरा गया है. इस अवैध धंधे से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. फोरलेन व ग्रैंडकॉर्ड रेलवे लाइन के बीच पोड़ा बनाने के धंधा अधिकारियों की आंखों के सामने जारी है. लेकिन, इस पर सभी लोग चुप्पी साधे बैठे हैं. प्रशासनिक अधिकारियों की इस चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं.
वैध की तरह चल रहा अवैध धंधा: इस क्षेत्र में पोड़ा लगाने का अवैध धंधा खुलेआम चल रहा है. सैकड़ों ट्रक कच्चा कोयला जगह-जगह इकट्ठा कर पकाया जाता है. जिससे निकलने वाला धुआं पर्यावरण के लिए सबसे खतरनाक माना जाता है. जलते कोयले से उड़ कर चिनगारी दूरी तक जाती है, जिससे आस-पास के क्षेत्रों में आग लगने की घटना की आशंका बनी रहती है. इस तरह की घटना पर प्रशासन को जवाब देना मुश्किल हो जायेगा.
स्मोकलेश उद्योग के लिए सरकार द्वारा लाइसेंस देने का प्रावधान है. कोयले को पका कर धुआं रहित बनाने के लिए उद्योग लगाने का प्रावधान है. लेकिन, चंद रुपयों की लालच में जनमानस के जीवन के साथ खुलेआम खिलवाड़ करते हुए पोड़ा लगाया जा रहा है.
लगातार छापेमारी की उठी मांग
शहर के बुद्धिजीवियों ने पर्यावरण के लिए सबसे खतरनाक माने जाने वाले पोड़ा लगाने के कार्य को बंद कराने की प्रशासन से मांग की है. लोगों ने अवैध क्रशरों के विरुद्ध हो रही कार्रवाई की तरह इस अवैध धंधे को भी बंद कराने के लिए लगातार छापेमारी की मांग की है. लोगों का मानना है कि अबतक की कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति के लिए हुई है. करीब दो माह पहले मनौरा में पोड़ा के विरुद्ध प्रशासन ने कार्रवाई की थी. कार्रवाई के तुरंत बाद ही अवैध धंधा शुरू हो गया. लेकिन, दोबारा प्रशासन को उस ओर रूख नहीं हुआ.
