अमौर. प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा)की योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए पांच दिवसीय सोशल ऑडिट सामाजिक अंकेक्षण का समापन शनिवार को ग्रामसभा सह जनसुनवाई के साथ हुआ. इस दौरान पंचायतों में मनरेगा के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत सामने आई, जहां मजदूरों ने काम की कमी और अनियमितताओं को लेकर अपनी आवाज बुलंद की. विभागीय निर्देशानुसार, 18 मई से 23 मई तक वित्तीय वर्ष 2025-26 में संचालित योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण किया गया. ज्यूरी टीम के लीडर सुरेंद्र कुमार, चमेली देवी, संजय कुमार, रोजी कुमारी, प्रीति कुमारी, विपिन कुमार, पूजा कुमारी, राखी कुमारी, आशीष कुमार और अस्मिता की टीम ने विभिन्न पंचायतों का सोशल ऑडिट किया. अंकेक्षण टीम ने केवल फाइलों की जांच नहीं की, बल्कि ”डोर टू डोर” (घर-घर) पहुंचकर योजना के वास्तविक लाभुकों से सीधा संवाद किया. इस दौरान टीम ने पंचायत में मनरेगा के तहत कौन-कौन सी योजनाएं धरातल पर उतरीं. कितने मानव दिवस सृजित किए गए. मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान समय पर हो रहा है या नहीं. पंचायत में आयोजित जनसुनवाई सह ग्राम सभा में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की भारी उपस्थिति रही. इस दौरान मनरेगा मजदूरों ने शिकायत की कि नियमानुसार पंचायत में रोजगार दिवस का आयोजन नहीं किया जाता, जिससे उन्हें अपनी मांग रखने का मंच नहीं मिलता. ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें साल भर नियमित रूप से काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे पलायन की स्थिति बनी रहती है. मजदूरों ने अपनी समस्याओं के तत्काल निदान हेतु पंचायत स्तर पर बेहतर समन्वय की मांग की.
मनरेगा योजना को लेकर ग्रामसभा सह जनसुनवाई में मजदूरों ने सुनायी अपनी पीड़ा
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