नाट्य कार्यशाला में प्रस्तुति देते कलाकार

पूर्णिया के मीरगंज में 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला शुरू: फणीश्वर नाथ रेणु की 'महुआ घटवारिन' सीख रहे ग्रामीण युवा; रंगमंच का ले रहे प्रशिक्षण

पूर्णिया के मीरगंज में 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला ग्रामीण युवाओं के लिए आयोजित की जा रही है। प्रतिभागी फणीश्वर नाथ रेणु की 'महुआ घटवारिन' के मंचन की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें अभिनय, संवाद और भाव-भंगिमा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पूर्णिया. मीरगंज के मोहना टोल स्थित प्राथमिक विद्यालय रामनगर में सांस्कृतिक आंचल संस्था के सौजन्य से ग्रामीण युवाओं के लिए 15 दिवसीय नाट्य कार्यशाला आयोजित की जा रही है. कार्यशाला में प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अभिनय, संवाद प्रेषण, भाव-भंगिमा और मंचीय कला से जुड़े विभिन्न आयामों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके साथ ही महान कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु की चर्चित कहानी ‘महुआ घटवारिन’ के मंचन की तैयारी भी करायी जा रही है.

अभिनय से लेकर संवाद और भाव-भंगिमा तक का प्रशिक्षण

नाट्य कार्यशाला में शामिल ग्रामीण कलाकारों को मंच पर अभिनय करने की बारीकियां सिखायी जा रही हैं. प्रशिक्षण के दौरान संवादों के प्रभावी प्रेषण, भाव-भंगिमा, पात्र के अनुरूप अभिनय और मंच पर प्रस्तुति देने की तकनीक पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. विशेषज्ञ कलाकारों को अभ्यास के माध्यम से मंचीय प्रस्तुति के लिए तैयार कर रहे हैं.

‘महुआ घटवारिन’ के मार्मिक दृश्य का कराया जा रहा अभ्यास

कार्यशाला में फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी ‘महुआ घटवारिन’ के मंचन की विशेष तैयारी की जा रही है. नाटक के एक महत्वपूर्ण दृश्य में परदेसी व्यापारी महुआ को खरीदकर जबरन अपने साथ ले जाना चाहता है. अपनी अस्मिता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए महुआ नदी में कूद जाती है.

इस मार्मिक और प्रभावशाली दृश्य को मंच पर प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के लिए कलाकार लगातार अभ्यास कर रहे हैं. पात्रों की भावनाओं और दृश्य की संवेदनशीलता को अभिनय के माध्यम से उभारने पर प्रशिक्षकों का विशेष जोर है.

ग्रामीण कलाकारों में दिख रहा खासा उत्साह

मुख्य प्रशिक्षक निलेश कुमार और सहायक प्रशिक्षक अंकित कुमार आर्य के मार्गदर्शन में ग्रामीण कलाकार प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. कार्यशाला में कलाकारों के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है. प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को अपनी अभिनय प्रतिभा को निखारने और मंचीय कला को समझने का अवसर मिल रहा है.

15 दिनों तक चलेगी नाट्य कार्यशाला

सांस्कृतिक आंचल संस्था के सौजन्य से आयोजित यह नाट्य कार्यशाला 15 दिनों तक चलेगी. कार्यशाला के दौरान कलाकारों को नियमित अभ्यास के साथ नाटक के विभिन्न दृश्यों, संवादों और पात्रों की प्रस्तुति के लिए तैयार किया जा रहा है. इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को रंगमंच से जोड़ने और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच देने का प्रयास किया जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By सत्येन्द्र सिन्हा गोपी

सत्येन्द्र सिन्हा गोपी प्रिंट माध्यम में 25 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. आकाशवाणी एवं दूरदर्शन समाचार से पत्रकारिता की शुरुआत की. नाटक, कला संस्कृति, गीत संगीत, कृषि व मेडिकल क्षेत्र में विशेष अभिरुचि रखते हैं.

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