'बिहार लोकल बॉडीज एम्प्लाइज फेडरेशन' और 'बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा' के आह्वान पर पूर्णिया जिला नगर निकाय कर्मचारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रही. करीब 500 से अधिक कर्मचारियों के एक साथ काम बंद करने से पूरे नगर निगम क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. शहर के मुख्य चौराहों, रिहायशी इलाकों और बाजारों में कचरे का अंबार लग गया है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
सड़कों पर बिखरा 90 टन कचरा, उठ रही असहनीय दुर्गंध
कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, मुख्य सड़कों की झाड़ू-सफाई और डंपिंग यार्ड तक कचरा पहुंचाने का काम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है.
- दैनिक कचरा उठाव बंद: रोजाना उठने वाला लगभग 90 टन कूड़ा-कचरा गलियों और मुख्य मार्गों पर ही सड़ रहा है.
- भट्ठा बाजार की बुरी हालत: भट्ठा बाजार सब्जी हाट के सामने बीच सड़क पर ही कचरे का बड़ा ढेर जमा हो गया है, जहाँ से उठती भीषण दुर्गंध ने दुकानदारों और राहगीरों का सांस लेना दूभर कर दिया है.
- प्रमुख इलाके प्रभावित: लाइन बाजार, बस स्टैंड, भट्ठा बाजार, मधुबनी और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में डस्टबिन ओवरफ्लो होकर सड़कों पर गिर रहे हैं.
नागरिक सेवाओं पर भी पड़ा ताला
हड़ताल का असर केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं है. नगर निगम कार्यालय में भी कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने से:
- जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने का काम,
- विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रशासनिक निपटारा, और
- नागरिक सुविधा से जुड़ी अन्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं.
भीषण गर्मी और उमस के बीच शहरवासियों को डर है कि यदि यह हड़ताल जल्द खत्म नहीं हुई, तो शहर में संक्रामक बीमारियां फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा.
कर्मचारियों की मुख्य मांगे क्या हैं?
हड़ताली सफाई कर्मियों और कर्मचारी संघ की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- आउटसोर्सिंग (Outsourcing) प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जाए.
- समान काम के लिए समान वेतन की नीति लागू हो.
- बकाए मानदेय और ईपीएफ (EPF) का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए.
- कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरण और बेहतर कार्य परिस्थितियां प्रदान की जाएं.
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
निगम प्रशासन की ओर से गतिरोध दूर करने और वार्ता के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कर्मचारी संघ अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है. संघ के प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक प्रशासन उनकी वाजिब मांगों पर ठोस और लिखित समझौता नहीं करता, तब तक कोई भी कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटेगा.
