जाली लॉटरी के माध्यम से होता है सीमांचल में करोड़ों का कारोबार

लॉटरी प्रिंट होकर दिल्ली से पहुंचता है पूर्णिया व दालकोला

– हर महीने 50 लाख जाली लॉटरी प्रिंट होकर दिल्ली से पहुंचता है पूर्णिया व दालकोला प्रभात खबर फालोअप पूर्णिया. 7 वर्ष पूर्व मुजफ्फरपुर का एक शख्स जाली लॉटरी कारोबार का सरगना माना जाता था. उसका बिहार में एक महीने में लगभग 5 करोड़ का जाली लॉटरी का कारोबार केवल कोसी और सीमांचल के इलाके में होता था. लेकिन समय के साथ जाली लॉटरी के कारोबार में अब कई लोग सक्रिय हो गये हैं. जानकारों की माने तो हर महीने सीमांचल एवं पश्चिम बंगाल के दालकोला में 50 लाख जाली लॉटरी दिल्ली से प्रिंट होकर पहुंच रहा है. 50 लाख की जाली लॉटरी के प्रिंट में 50 हजार रुपये का खर्च होता है. जाली लॉटरी में मिजोरम, नागालैंड एवं सिक्किम स्टेट की लॉटरी प्रिंट की जाती है. लॉटरी के खेल में शामिल लोग असली या जाली टिकट के बारे में अधिक पूछताछ भी नहीं करते, क्योंकि मामला महज 10, 20 या 100 रुपये का होता है. इस प्रकार यह काला कारोबार खूब फल फूल रहा है. गुरुवार की सुबह गुलाबबाग टीओपी द्वारा जीरोमाइल पर एक ऑटो से एक करोड़ 74 लाख 48 हजार मूल्य के 14 लाख 44 हजार लॉटरी की टिकट बरामद किया गया. इस संबंध में टीओपी प्रभारी द्वारा यह खुलासा किया गया है कि इतनी संख्या में बरामद लॉटरी की टिकट जाली बतायी जा रही है. पुलिस के अनुसार पकड़ाये ऑटो चालक एवं गुप्त सूचना के द्वारा इस मामले में पांच लॉटरी कारोबारी के नाम सामने आये हैं, जिनकी तहकीकात की जा रही है. इनमें पश्चिम बंगाल के दालकोला का एक शख्स का भी नाम उजागर हुआ है जो जाली लॉटरी का बड़ा कारोबारी बताया जाता है. दालकोला के इस शख्स द्वारा सीमांचल के इलाके में जाली लॉटरी की आपूर्ति एजेंट के द्वारा करता है. जबकि सीमांचल के जिलों में उसका एक मुख्य एजेंट मौजूद है. ऐसा माना जाता है कि इस कारोबार में खुश्कीबाग और गुलाबबाग के कुछ सफेदपोश की भी सहभगािता है, जो इस काले धंधे में एक निश्चित कमीशन की हकदार हें. जाली लॉटरी कारोबार में 100 फीसदी मुनाफा सूत्रों की मानें तो लॉटरी के धंधे से जुड़े कारोबारियों का करोड़पति होने का राज जाली लॉटरी ही है. आम लोग असल और नकल के खेल से वाकिफ नहीं है और हर दिन लॉटरी बाजार में लूट रहे हैं. जाली लॉटरी के धंधे में 100 फीसदी मुनाफा होने के कारण कारोबारी दिन प्रतिदिन फल फूल रहे हैं. राज्य में लॉटरी पर प्रतिबंध के बावजूद भले ही कारोबारियों की परेशानी बढ़ी, लेकिन इसका भी धीरे-धीरे निदान निकल गया. अब अवैध लॉटरी के साथ जाली लॉटरी का कारोबार धड़ल्ले से जारी है. असली लॉटरी में कमीशन के आधार पर मुनाफा प्राप्त होता है. जबकि जाली लॉटरी में प्रिंट खर्च को छोड़ कर 100 फीसदी मुनाफा हो रहा है. चूंकि राज्य में लॉटरी का धंधा प्रतिबंधित है, इस वजह से इस खेल में शामिल पीड़ितों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से विरोध नहीं किया जाता है. इस स्थानों पर हो रही लॉटरी की बिक्री जानकारों की माने तो शहर के गुलाबबाग जीरोमाइल, सोनौली चौक, गोंडा चौक, कटिहार मोड़, खुश्कीबाग हाट, खुश्कीबाग रेलवे गुमटी, बेलौरी चौक, लाइन बाजार शिव मंदिर के पास , झंडा चौक, भट्ठा बाजार सब्जी हाट, डिलक्स होटल के निकट, नेवालाल चौक, सुदीन चौक, बस स्टैँड, पॉलिटेक्निक चौक, मधुबनी हाट, गिरजा चौक, लाइन बाजार के छोटी मस्जिद के निकट खुदरा लॉटरी बेची जा रही है. लॉटरी बिक्री के कारोबार में लगभग 150 भेंडर सक्रिय हैं., जो सुबह से लेकर देर शाम अपने अपने क्षेत्रों में घूम घूम कर पॉकिट में लॉटरी रख कर बेचने का धंधा कर रहे हैं.

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By ARUN KUMAR

ARUN KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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