पूर्णिया. कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन, पूर्णिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय विलुप्तप्राय लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के आठवें दिन प्रतिभागियों ने कजरी गीत और झिझिया लोकनृत्य का अभ्यास किया. प्रेक्षागृह सह आर्ट गैलरी स्थित आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित कार्यशाला में बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली.
8 सितंबर तक चलेगा निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम
25 अगस्त से शुरू हुआ यह निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम 8 सितंबर तक चलेगा. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बिहार की विभिन्न लोक विधाओं के मूल एवं पारंपरिक स्वरूप की जानकारी दी जा रही है. इसके साथ ही लोक विधाओं के शास्त्र पक्ष, प्रयोग पक्ष और बेहतर मंचीय प्रस्तुति के गुर भी सिखाए जा रहे हैं.
कजरी गीत और झिझिया नृत्य का कराया गया अभ्यास
कार्यशाला के आठवें दिन कजरी गीत और झिझिया लोकनृत्य को प्रशिक्षण का केंद्र बनाया गया. प्रतिभागियों ने पारंपरिक शैली में गीत और नृत्य का अभ्यास किया. प्रशिक्षण के माध्यम से कलाकारों को लोक विधाओं की बारीकियों से परिचित कराने के साथ मंच पर उनकी प्रभावी प्रस्तुति के लिए तैयार किया जा रहा है.
नई पीढ़ी तक लोक संस्कृति पहुंचाना उद्देश्य
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बिहार की विलुप्तप्राय लोकगीत एवं लोकनृत्य विधाओं का संरक्षण करना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना है. आयोजकों का मानना है कि पारंपरिक लोक कलाओं को प्रशिक्षण और मंच मिलने से इन विधाओं को जीवित रखने में मदद मिलेगी. स्थानीय कलाकारों और युवाओं की भागीदारी से लोक संस्कृति के संरक्षण को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
इच्छुक कलाकार करा सकते हैं निःशुल्क पंजीकरण
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी पंकज कुमार पटेल ने बताया कि इच्छुक कलाकार और स्थानीय नागरिक प्रेक्षागृह सह आर्ट गैलरी, पूर्णिया पहुंचकर निःशुल्क पंजीकरण करा सकते हैं. उन्होंने स्थानीय लोगों और कलाकारों से लोक संस्कृति संरक्षण के इस अभियान से जुड़ने की अपील की.
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