बढ़ती गर्मी व लू की संभावना को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर

तैयार किये गये विशेष सुविधाओं वाले लू वार्ड

सभी अस्पतालों में तैयार किये गये विशेष सुविधाओं वाले लू वार्ड

पूर्णिया. गर्मी के मौसम में गर्म हवाओं एवं लू व विभिन्न मौसमी बीमारियों की संभावनाओं को देखते हुए प्रभावित लोगों को समय पर सुरक्षित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार है. इसके तहत लू ग्रसित मरीजों के उपचार के लिए सभी प्रखंड के अस्पतालों में विशेष लू वार्ड बनाये गये हैं जहां लू ग्रसित मरीजों को आवश्यक चिकित्सिकीय सहायता उपलब्ध करायी जाएगी. दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को गर्मी के मौसम में विशेष सावधानी बरतते हुए अपने कार्य को करने की अपील भी की जा रही है. सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि गर्मी में लू ग्रसित होने से सुरक्षा के लिए लोगों को पहले से सावधानी बरतने की आवश्यकता है. एपिडेमियोलॉजिस्ट नीरज कुमार निराला ने बताया कि लू ग्रसित मरीजों के लिए सभी प्रखंड स्वास्थ्य केंद्रों में अलग से लू वार्ड बनाये गये हैं जहां आवश्यक बेड के साथ साथ उपचार के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध है. साथ साथ मरीजों की सुरक्षा के लिए लू वार्ड में एसी, कूलर एवं पंखा उपलब्ध करायी गयी है. उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित मरीजों को अस्पताल आने जाने के लिए एसी युक्त एम्बुलेंस का उपयोग किया जाएगा.

लू लगने पर ओआरएस का घोल जरुरी

सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि घर में लू से सुरक्षा के लिए लोगों को ओआरएस का घोल, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी आदि का उपयोग करना चाहिए. लू ग्रसित होने पर बेहोशी या चक्कर का आना, उल्टी, सिरदर्द, अधिक प्यास लगना, दिल का धड़कन तेज होना आदि हो सकता है. ऐसी स्थिति होने पर नजदीकी अस्पताल में चिकित्सकों से संपर्क करते हुए चिकित्सिकीय सहायता का लाभ उठाना चाहिए.

लू लगने पर क्या करें

-लू से ग्रसित मरीज को को छांव में लिटा कर कपड़े ढीला करें या हटा दें.

-ठंडे गीले कपड़े से शरीर पोछें या पानी से नहायें.

-ओआरएस/नींबू-पानी/नमक-चीनी का घोल पीड़ित को देते रहें.

-उल्टियां करने या बेहोशी जैसे मामले में कुछ भी खाने या पीने न दें.

-कूलर, पंखे आदि का उपयोग करें.

-गर्दन, पेट एवं सिर पर गीला तथा ठंडा कपड़ा रखें.

-पैर में तकिया का उपयोग करते हुए पैर को उठा कर रखें.

-पीड़ित के लिए छांछ, नींबू पानी, शरबत का सेवन लाभप्रद है.

-एक घंटे में सुधार नहीं होने पर मरीज को नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए.

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Author: SATYENDRA SINHA

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