पूर्णिया. नई दिल्ली में आयोजित एआई एजुकेशन समिट–2026 में पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा प्रणाली में व्यापक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है. उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से शिक्षा को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण, नवाचारी तथा छात्र-केंद्रित बनाया जा सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का उपयोग मानवीय मूल्यों, नैतिकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ संतुलित रूप से किया जाना चाहिए. उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रहकर तकनीकी नवाचारों को अपनाना होगा, ताकि विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप दक्ष बनाया जा सके. उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि पूर्णिया विश्वविद्यालय भी शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी उन्नयन एवं आधुनिक शैक्षणिक पद्धतियों को अपनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है. सम्मेलन में देश के अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा शिक्षा और तकनीक के समन्वय पर अपने विचार साझा किए. कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह इस सम्मेलन में बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति के निर्देशानुसार एवं प्रतिनिधि स्वरूप सम्मिलित हुए. इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का मुख्य विषय एआइ फॉर एजुकेशन, एआइ इन एजुकेशन था. इस सम्मेलन में देश के शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका और संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया. कुलपति की इस महत्वपूर्ण सहभागिता से पूर्णिया विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा एवं राष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहचान को और अधिक सुदृढ़ता प्राप्त हुई है.
एआई के माध्यम से शिक्षा अधिक सुलभ, नवाचारी व छात्र-केंद्रित होगी : प्रो. विवेकानंद
नवाचारी व छात्र-केंद्रित होगी : प्रो. विवेकानंद
