पूर्णिया शहर के बाड़ीहाट स्थित ऐतिहासिक एवं सिद्ध शिव-महावीर मंदिर में प्रतिष्ठापित भगवान श्री गणेश की महिमा पूरे अंचल में सनातन आस्था और अटूट विश्वास का प्रमुख केंद्र बनी हुई है. स्थानीय नागरिकों और व्यवसायियों के लिए यह मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि उनकी दिनचर्या की पहली सीढ़ी है.
'पहले देवाधिदेव और विघ्नहर्ता का दर्शन, फिर सांसारिक कर्म'—इसी पारंपरिक नियम के साथ यहां के लोग अपने दिन और व्यापारिक लेन-देन की शुरुआत करते हैं. मान्यता है कि बाड़ीहाट के इस पावन दरबार में गजानन के दर्शन मात्र से दिनभर के सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं और कारोबार में चौतरफा बरकत होती है.
विघ्नहर्ता के दर पर हर मुराद होती है पूरी: श्रद्धालुओं की अटूट आस्था
स्थानीय नागरिकों और दूर-दराज से आने वाले भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में भगवान गणेश साक्षात जाग्रत रूप में विराजमान हैं:
- दैनिक दर्शन की परंपरा: बाड़ीहाट, नया टोला सहित शहर के विभिन्न मुहल्लों के व्यापारी अपनी दुकानें खोलने और कामकाजी लोग दफ्तर जाने से पूर्व मंदिर की चौखट पर माथा टेकना नहीं भूलते.
- कष्टों से मुक्ति का विश्वास: भक्तों का कहना है कि सच्चे हृदय से जो भी याचक यहां बुद्धि, विवेक और समृद्धि की कामना लेकर आता है, विघ्नहर्ता उसकी झोली कभी खाली नहीं रहने देते.
बुधवार को उत्सव सा माहौल, सप्ताह भर सजते हैं विशेष दरबार
यूं तो मंदिर में प्रतिदिन प्रात:काल से ही वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की गूंज सुनाई देती है, लेकिन सप्ताह के विशेष दिनों पर यहां का नजारा देखते ही बनता है:
- बुधवार का महाअनुष्ठान: बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होने के कारण इस दिन मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहता है. सुबह से ही दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प लेकर महिला व पुरुष श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं.
- महादेव और पवनपुत्र की कृपा: करीब पांच दशक पुराने इस मंदिर में भगवान गणेश के साथ देवाधिदेव महादेव और संकटमोचन हनुमान जी भी प्रतिष्ठापित हैं. सोमवार को भोलेनाथ और मंगलवार को वीर बजरंगी के दर्शन हेतु विशेष भीड़ जुटती है.
पर्व-त्योहारों पर दुल्हन की तरह सजता है मंदिर परिसर
मंदिर केवल दैनिक पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े धार्मिक उत्सवों पर इसका रूप अलौकिक हो जाता है:
- भव्य सजावट: गणेश चतुर्थी, दीपावली, महाशिवरात्रि और सावन के महीने में समूचे मंदिर प्रांगण को रंग-बिरंगी डिजिटल लाइटों और ताजे सुगंधित फूलों से दुल्हन की तरह सजाया जाता है.
- अखंड शांति का केंद्र: मंदिर समिति और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह परिसर शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच अद्भुत मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है.
