नेपाल-भूटान से आने वाले भक्त क्यों जरूर रुकते हैं पूर्णिया के गुलाबबाग पंचमुखी हनुमान मंदिर में?

Aaj Ka Dharsan: पूर्णिया का गुलाबबाग पंचमुखी हनुमान मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि नेपाल, भूटान और पूर्वोत्तर भारत से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख पड़ाव बन चुका है. सावन में यहां देशी ही नहीं विदेशी भक्तों की भी भारी भीड़ उमड़ती है.

Aaj Ka Dharsan: पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट — पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले पूर्णिया के गुलाबबाग जीरोमाइल चौक पर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर आज सीमांचल की पहचान बन चुका है. नेपाल, भूटान, सिक्किम और पश्चिम बंगाल से सड़क मार्ग से गुजरने वाले श्रद्धालु यहां रुककर संकटमोचन के दर्शन जरूर करते हैं. सावन के महीने में यह मंदिर आस्था, भक्ति और धार्मिक ऊर्जा का बड़ा केंद्र बन जाता है.

अस्सी के दशक में रखी गई थी मंदिर की नींव

गुलाबबाग जीरोमाइल चौक पर स्थित इस मंदिर की शुरुआत अस्सी के दशक में हुई थी. समय के साथ स्थानीय व्यवसायी समाज और श्रद्धालुओं के सहयोग से इसका विस्तार किया गया और आज यह मंदिर भव्य स्वरूप में नजर आता है. मंदिर का आकर्षक ढांचा और पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा भक्तों को दूर से ही अपनी ओर आकर्षित करती है.

पंचमुखी स्वरूप से जुड़ी है विशेष मान्यता

यह मंदिर भगवान हनुमान के पंचमुखी स्वरूप को समर्पित है. धार्मिक मान्यता है कि पंचमुखी हनुमान नकारात्मक शक्तियों और संकटों से रक्षा करते हैं. यही वजह है कि यहां नियमित रूप से विशेष पूजन, अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी यहां मनोकामना लेकर पहुंचते हैं.

नेपाल से लेकर पूर्वोत्तर तक के भक्तों का पड़ाव

मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण इसका लोकेशन है. जीरोमाइल चौक राष्ट्रीय मार्ग से जुड़ा होने के कारण नेपाल, भूटान, बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले यात्री यहां आसानी से पहुंच जाते हैं. पटना या बिहार के अन्य हिस्सों की ओर जाने वाले श्रद्धालु यहां कुछ देर रुककर पूजा-अर्चना करते हैं. यही कारण है कि यह मंदिर सीमांचल ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय आस्था केंद्र के रूप में भी पहचान बना चुका है.

मंगलवार और शनिवार को लगता है महाभोग

गुलाबबाग पंचमुखी हनुमान मंदिर में हर मंगलवार और शनिवार को खिचड़ी महाभोग का आयोजन किया जाता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं. हनुमान जन्मोत्सव और सावन के दौरान यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान, भंडारा और कांवरियों के लिए शिविर भी लगाए जाते हैं. पूरे सावन में मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भक्ति से गुलजार रहता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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