Valmiki Tiger Reserve में ‘डेडली ट्रैप’! पानी पीने उतरा Tiger बना मगरमच्छ का शिकार! 3 महीने में तीसरी मौत

Valmiki Tiger Reserve tiger death : Valmiki Tiger Reserve में मगरमच्छ ने बाघ को अपना शिकार बना लिया है. ये घटना चौंकाने वाली है. मगर गौर करने वाली बात ये है कि इस साल अब तक 3 बाघों की मौत इसी वीटीआर में हो चुकी है. ऐसे में VTR में बाघों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं. जानिए पूरी घटना और वजह।

Valmiki Tiger Reserve Tiger Death : बिहार के Valmiki Tiger Reserve से एक ऐसी खबर आ रही है कि जिसे सुन कर आपके रोंगट खड़े हो जाएंगे. जंगल का सबसे शानदार शिकारी इस बार खुद शिकार बन गया. जी हां, सबसे खूंखार शिकारी यानी टाइगर शिकार हो गया है. वो भी एक मगरमच्छ का!

क्या हुआ उस दिन?

बताया जा रहा है कि त्रिवेणी कैनाल इलाके में एक बाघ रोज पानी पीने आता था. रोज की तरह वह घटना वाले दिन भी कैनाल में पानी पीने उतरा था. मगर, उसे क्या पता था कि शांत पानी के नीचे पानी का राजा मौत बनकर उसका इंतजार कर रहा है. जैसे ही बाघ पानी में गया, पहले से छिपे मगरमच्छ ने जंगल के शिकारी पर हमला कर दिया. उसके अपने जबड़े में जकड़ लिया और गहरे पानी में ले गया. ये जानकारी वन विभाग की ओर से आज दी गई है.

क्षत-विक्षत मिला बाघ

जब तक वन विभाग को बाघ और मगरमच्‍छ के बीच हुई भिड़ंत की जानकारी मिली, तब-तक सब खत्म हो चुका था. वन विभाग का कहना है कि घंटों की मशक्कत के बाद जो मिला, वो सिर्फ बाघ के क्षत-विक्षत अवशेष थे. बाघ के मृत शरीर की हालत इतनी खराब थी कि जिसने भी देखा वह सिहर गया. बाघ के शरीर के चीथड़े और मांस के टुकड़े ही कलेक्‍ट किए जा सके. वन विभाग का कहना है कि बाघ पर मगरमच्‍छ का ये हमला वाकई चौंकाने वाला है.

क्‍या बाघ के लिए सुरक्षित नहीं VTR?

खैर, यह घटना भले ही वन विभाग को चौंकाया हो! देखने वालों को सिहराया हो! मगर सवाल तो ये है कि क्‍या वाल्मिकी टाइगर रिजर्व यानी VTR वाकई बाघों के लिए सुरक्षित है या नहीं? बड़ा सवाल ये है कि आखिर जंगल का सबसे शानदार और फुर्तिला शिकारी खुद कैसे शिकार हो गया? वहीं, सबसे बड़ा सवाल तो वीटीआर की उस डारावने सच पर भी है कि अब तक बिहार के गौरव कहे जाने VTR में तीन महीने में तीन बाघ की मौत हो चुकी है.

डराने वाला पैटर्न, 3 महीने में 3 मौत

वीटीआर में बाघ के मौत की सिर्फ पहली घटना नहीं है. इसी साल तीन बाघ अपनी जान गंवा चुके हैं. लगातार हो रहीं ऐसी घटनाएं किसी पैटर्न की ओर तो इशारा नहीं कर रहीं! वीटीआर में बाघों की मौत चिंता का विषय है. क्‍योंकि‍ बिहार के वीटीआर में बाघों की संख्‍या सबसे ज्‍यादा है. जिसकी वजह से ये अवैध शिकारियों और बाघों के अंगों की तस्‍करी करने वालों के निशाने पर भी है. वहीं, दूसरी ओर बाघों की बढ़ती संख्‍या के बीच जंगल में मनुष्‍यों की बढ़ती आबादी भी बाघों के लिए खतरा बन रही है.
जनवरी: करंट लगाकर खेत में बाघ की हत्‍या
हाल ही में: रेस्क्यू के दौरान गिरने से किशोर बाघिन की मौत
अब मार्च: मगरमच्छ ने बाघ को बनाया शिकार
2026 में अब तक 3 टाइगर की मौत हो चुकी है और हर बार अलग कारण!

क्या जंगल सुरक्षित है?

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस समय रिजर्व में टाइगर काउंटिंग चल रही है. ऐसे में लगातार हो रही मौतें वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े कर रही हैं. क्या टाइगर अब अपने ही घर में सुरक्षित नहीं? क्या इंसानी लापरवाही और प्राकृतिक खतरे मिलकर इनकी जिंदगी खत्म कर रहे हैं?

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लेखक के बारे में

By Keshav Suman Singh

बिहार-झारखंड और दिल्ली के जाने-पहचाने पत्रकारों में से एक हैं। तीनों विधाओं (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब) में शानदार काम का करीब डेढ़ दशक से ज्‍यादा का अनुभव है। वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में बतौर डिजिटल हेड बिहार की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले केशव नवभारतटाइम्‍स.कॉम बतौर असिसटेंट न्‍यूज एडिटर (बिहार/झारखंड), रिपब्लिक टीवी में बिहार-झारखंड बतौर हिंदी ब्यूरो पटना रहे। केशव पॉलिटिकल के अलावा बाढ़, दंगे, लाठीचार्ज और कठिन परिस्थितियों में शानदार टीवी प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं। जनसत्ता और दैनिक जागरण दिल्ली में कई पेज के इंचार्ज की भूमिका निभाई। झारखंड में आदिवासी और पर्यावरण रिपोर्टिंग से पहचान बनाई। केशव ने करियर की शुरुआत NDTV पटना से की थी।

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