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एक क्षेत्र में साथ-साथ नहीं होंगी तेजस्वी और कन्हैया की सभाएं, कांग्रेस की तिकड़ी से तेजस्वी का सीधा मुकाबला

तारापुर और कुशेश्वरस्थान में राजद की कमान संभाल रहे तेजस्वी यादव को जवाब देने के लिए कांग्रेस ने युवा चेहरे को ही सामने खड़ा कर दिया है. वो भी एक नहीं, एक साथ तीन-तीन युवा नेताओं को. तीनों सीधा तेजस्वी को चुनौती देंगे.

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
तेजस्वी यादव और कन्हैया कुमार
तेजस्वी यादव और कन्हैया कुमार
फाइल

पटना. तारापुर और कुशेश्वरस्थान में राजद की कमान संभाल रहे तेजस्वी यादव को जवाब देने के लिए कांग्रेस ने युवा चेहरे को ही सामने खड़ा कर दिया है. वो भी एक नहीं, एक साथ तीन-तीन युवा नेताओं को. तीनों सीधा तेजस्वी को चुनौती देंगे.

बिहार विधानसभा चुनाव में यह पहली बार देखने को मिलेगा जब तेजस्वी, कन्हैया, हार्दिक पटेल एक दूसरे के खिलाफ ही हमला बोलते हुए दिखाई पड़ेंगे. यह देखना दिलचस्प होगा कि 2 सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव में कन्हैया, जिग्नेश और हार्दिक पटेल की तिकड़ी तेजस्वी को कैसे गिराती है और तेजस्वी इसका जवाब कैसे देते हैं?

वैसे इस संदर्भ में खास बात यह है कि एक तरफ राजद नेता तेजस्वी यादव दोनों जगहों पर अपनी दर्जनों सभाएं कर चुके हैं. वहीं, कन्हैया ने अब तक ताल तक नहीं ठोकी है. हालांकि, कन्हैया कुमार की जन सभाएं 23 अक्तूबर से तारापुर से शुरू होने जा रही हैं. सियासी जानकार बताते हैं कि दोनों नेता शायद एक ही पंचायत या प्रखंड में अपनी-अपनी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करते नजर आएं.

सियासी जानकारों के मुताबिक तेजस्वी यादव तारापुर विधानसभा के बाद कुशेश्वरस्थान विधानसभा में डेरा डाले हुए हैं. रविवार तक वह वहां चुनाव प्रचार करेंगे. उम्मीद जतायी जा रही है कि वह सोमवार से एक बार फिर तारापुर पहुंचेंगे.

इधर, कन्हैया कुमार तारापुर में 23 से रविवार 24 अक्तूबर तक चुनाव प्रचार पूरा कर चुके होंगे. और जब तेजस्वी यादव तारापुर क्षेत्र में दोबारा पहुंचेंगे ,तब कन्हैया कुमार 26 और 27 को कुशेश्वरस्थान विधानसभा में चुनाव प्रचार कर रहे होंगे. इस तरह दोनों नेता शायद ही किसी विधानसभा क्षेत्र में एक ही दिन प्रचार के लिए मौजूद हों. जानकार इसे एक सोची- समझी रणनीति मान कर चले हैं.

जानकारी के मुताबिक जब कन्हैया कुमार महागठबंधन के घटक दल सीपीआइ में थे, तब भी तेजस्वी यादव ने उनके साथ कोई मंच साझा नहीं किया था. उस चुनाव में कन्हैया कुमार की सक्रियता तुलनात्मक रूप में उनसे कम दिखी थी.

Posted by Ashish Jha

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