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सृजन घोटाला : घोष को भेजा गया जेल, सामने आये बड़े नाम

इडी ने सृजन घोटाले के मुख्य आरोपितों में एक पीके घोष (प्रणव कुमार घोष) से गहन पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी कर ली है. यह खातों से पैसे को ट्रांसफर करने का मास्टरमाइंड है. इसके बाद रविवार को उसे फुलवारीशरीफ जेल भेज दिया गया है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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सृजन
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फाइल फोटो

पटना. इडी ने सृजन घोटाले के मुख्य आरोपितों में एक पीके घोष (प्रणव कुमार घोष) से गहन पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी कर ली है. यह खातों से पैसे को ट्रांसफर करने का मास्टरमाइंड है. इसके बाद रविवार को उसे फुलवारीशरीफ जेल भेज दिया गया है. इसके बाद इडी अब जल्द ही इस मामले में कुछ अन्य आरोपितों को भी बुलाकर पूछताछ कर सकता है. इसमें दो लोग किशोर घोष और विपिन शर्मा के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं.

गिरफ्तार पीके घोष सीए (चार्टर्ड एकाउंटेंट) हैं और सृजन महिला विकास सहयोग समिति के सभी खातों का पूरा हिसाब वह ही देखते थे. वह स्वर्गीय मनोरमा देवी के सेक्रेटरी के रूप में भी काम करते थे. उससे पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण बातें सामने आयी हैं. इसमें कुछ अधिकारियों के भी नाम सामने आये हैं, जिनकी मिलीभगत सृजन घोटाले में है.

इडी ने पीके घोष से मुख्य रूप से सृजन के खातों और इनसे हुए लेन-देन के बारे में ही जानकारी प्राप्त की है. कुछ अहम जानकारी इडी के हाथ लगी है जिसके आधार पर कुछ सफेदपोशों पर भी जल्द ही कार्रवाई हो सकती है.

इस मामले की जांच के दौरान मनोरमा देवी की बेटी कल्पना कर्ण और सीमा कुमार ने बताया कि जब उनकी मां की तबीयत काफी खराब हुई, तो भागलपुर से नयी दिल्ली एयर एंबुलेंस से ले जाने की व्यवस्था की गयी. तब पीके घोष ने कुछ जरूरी कागजात इन्हें नहीं दिये, जिसकी वजह से मनोरमा देवी दिल्ली इलाज कराने नहीं जा सकीं, क्योंकि निजी सहायक होने के नाते पीके घोष ही मनोरमा देवी के सभी अहम कागजात रखते थे.

पीके घोष ने बताया कि किस तरह से सरकारी खजाने से पैसे सृजन के निजी बैंक खातों में आरटीजीएस, चेक व ड्रॉफ्ट समेत अन्य माध्यमों में से ट्रांसफर होते थे. यह पूरा खेल बैंक अधिकारियों की जानकारी में होता था. इसके बाद ये रुपये आगे तक ट्रांसफर होते थे. भागलपुर के ज्ञानेंद्र नाथ मुखर्जी रोड के रहने वाले पीके घोष के खाते में सृजन के खाते से 25 लाख रुपये ट्रांसफर किये गये थे. ये रुपये अगस्त, 2014 से जनवरी, 2015 के बीच 11 चेक के माध्यम से ट्रांसफर किये गये थे.

इस राशि से उसने पुणे में आर्च गैलेरी के प्रथम तल में पत्नी अमृता घोष के नाम से एक फ्लैट खरीदा था. हालांकि, पूछताछ में उसने यह बताया कि ये रुपये उसने सृजन से लोन के रूप में लिये थे, लेकिन इस लोन की किस्त उसने कभी सृजन को नहीं लौटायी और न ही इससे संबंधित दस्तावेज ही वह प्रस्तुत कर पाया. इसके अलावा उसने 2003-04 से 2007-08 के बीच बड़ी संख्या में अचल संपत्ति बनायी, लेकिन वह आय का स्रोत बताने में नाकाम रहा.

घोष ने सृजन के खातों से 230 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाले थे

इडी की जांच में यह सामने आयी कि सृजन के बैंक खातों में गलत तरीके से सरकारी पैसे ट्रांसफर होकर आते थे. फिर इन खातों से पीके घोष ही सभी रुपये मनोरमा देवी के हस्ताक्षर वाले चेक से निकालता था. उस दौरान तीन-चार साल में घोष ने सृजन के दो बैंक खातों से 230 करोड़ रुपये से ज्यादा दर्जनों चेक के माध्यम से निकाले थे.

इस मामले की जांच के दौरान जब उसे सितंबर-अक्तूबर, 2019 के दौरान इडी ने उससे पूछताछ के लिए उपस्थिति होने का आदेश दिया था, तब भी वह हाजिर नहीं हुआ था. फिर कोरोना की लहर के कारण यह कार्रवाई थोड़ी धीमी पड़ गयी. इसके बाद कुछ अन्य दस्तावेजों में भी उसकी गड़बड़ी सामने आने के बाद उसे फिर से इडी ने समन करके बुलाया और पूछताछ के बाद जब अपनी संपत्ति का सही स्रोत बताने में सफल नहीं हुआ, तो उसकी गिरफ्तारी की गयी.

Posted by Ashish Jha

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