Patna News: (संवाददाता, पटना) पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्टोर रूम में दवा व इंजेक्शन की उपलब्धता होने के बावजूद मरीजों से बाहर से नर्स व दवा मंगा रही हैं. एक से डेढ़ हजार रुपये की दवाएं व इंजेक्शन मरीज बाहर से खरीदने को मजबूर हो रहे हैं. यह समस्या भर्ती मरीजों के साथ देखने को मिल रही है. इतना ही नहीं वार्ड में भर्ती मरीजों को देखने तक कोई नहीं आता है. जबकि, अधीक्षक डॉ राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त दवाएं है. हाल ही में बीएमआइसीएल (BMICL) की ओर से सभी दवाओं का स्टॉक भारी मात्रा में पहुंचा है. ऐसे में बाहर से दवाएं क्यों और कब मंगाई गई हैं इसके बारे में जानकारी लेकर नियमानुसार कार्यवाही भी जायेगी.
नर्स व कर्मियों की मिलीभगत से हो रहा काम
पीएमसीएच में मरीजों को मुफ्त दवा मिलने की व्यवस्था है, लेकिन हकीकत इससे एकदम उलट है. नर्सों और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से दवाएं स्टाक खत्म बताकर मरीजों के परिजनों को बाहर से वही दवा खरीदने को मजबूर किया जाता है. इस पूरे रैकेट में अस्पताल परिसर में सक्रिय दलाल अहम भूमिका निभाते हैं, जो बाहर की दुकानों से दवाएं खरीद वाले है. विशेषज्ञ बताते है कि यह केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों के जीवन से खिलवाड़ है. अधीक्षक डा राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल में दवा पर्याप्त है. मेरोपेनम की भी आपूर्ति है. औरंगाबाद निवासी शक्ति सिंह और गया की रहने वाली प्रेम लता के मरीज के साथ इस तरह का मामला देखने को मिला. शक्ति अपने भाई के इलाज कराने पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि उनके भाई को जांडिंस व लिवर की समस्या है. यहां सीरिंज, इंजेक्शन भी बाहर से खरीदनी पड़ती है. इस तरह की समस्या कमोबेश सभी मरीजों के साथ है.
