Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने एक करोड़ 31 लाख रुपये से अधिक के बिजली चोरी मामले में बड़ी राहत देते हुए एक सजायाफ्ता व्यक्ति को बरी कर दिया है. अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में शिकायत करने वाला पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा. न्यायमूर्ति शैलेन्द्र सिंह की एकल पीठ ने मो. मकसूद आलम की ओर से दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने गया के स्पेशल बिजली कोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें अपील करने वाले को दोषी ठहराया गया था.
मामला क्या था
स्पेशल कोर्ट ने मो. मकसूद आलम को बिजली अधिनियम की धारा 135(1) के तहत दोषी मानते हुए तीन साल की कठोर कैद और 5000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि जुर्माना नहीं दिया गया तो चार महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी. अदालत ने यह भी माना था कि बिजली चोरी के कारण बिजली विभाग को एक करोड़ 31 लाख 33 हजार 664 रुपये का नुकसान हुआ है.
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हाईकोर्ट में चुनौती दी थी
इस फैसले को मो. मकसूद आलम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने मामले की गहराई से जांच की और पाया कि जांच और साक्ष्य दोनों ही बेहद कमजोर हैं. कोर्ट ने कहा कि इस केस में जांच अधिकारी की गवाही तक नहीं कराई गई. यहां तक कि छापेमारी के समय जांच अधिकारी मौके पर मौजूद भी नहीं था. केवल एक व्यक्ति अनिल पांडेय के बयान के आधार पर अपील करने वाले को आरोपी बना दिया गया था.
बाद में जांच के दौरान अनिल पांडेय को निर्दोष मानते हुए उसका नाम ट्रायल के लिए भेजा ही नहीं गया. कोर्ट ने यह भी पाया कि जिस परिसर की बात की जा रही है, वहां बिजली बिल का भुगतान नहीं होने के कारण पहले ही बिजली कनेक्शन काट दिया गया था.
इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि शिकायत करने वाला पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह असफल रहा. इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए मो. मकसूद आलम को सभी आरोपों से बरी कर दिया.
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