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कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा खून के थक्के जमने से हुईं मौतें, पटना के चार अस्पतालों में हुए डेथ ऑडिट में हुआ खुलासा

By Prabhat Khabar Print Desk
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खून
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फाइल फोटो

आनंद तिवारी, पटना. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में सबसे अधिक मौतें खून के थक्के जमने और लंग्स में इन्फेक्शन के कारण हुई हैं. साथ ही मरनेवालों में अधिकतर युवा हैं. यह बात पटना के चार मेडिकल कॉलेज अस्पतालों- पीएमसीएच, एम्स, आइजीआइएमए व एनएमसीएच में हुए डेथ ऑडिट में सामने आयी है.

58 दिनों में 1052 की मौत, अब तक 500 का हुआ डेथ ऑडिट

दूसरी लहर में पटना के आइजीआइएमएस, पीएमसीएच, एनएमसीएच और एम्स में चार अप्रैल से 31 मई तक 58 दिनों में कोरोना से 1052 लोगों की मौत हो हुई. इनमें 500 मरीजों का अब तक डेथ ऑडिट किया गया है. इसमें पाया गया है कि इनमें अधिकतर मौतें खून के थक्के जमने यानी थ्रोम्बोसिस के चलते हुई हैं.

इसके बाद दूसरे नंबर पर लंग्स में इन्फेक्शन के कारण हुई मौतें हैं. थ्रोम्बोसिस के चलते कोरोना के गंभीर मरीजों की चंद घंटों में जान चली गयी. अभी इन मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के डॉक्टर अन्य मृत मरीजों के डेथ ऑडिट में जुटे हैं.

500 में 280 की मौत खून के थक्के जमने से हुई

पटना के इन मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के डॉक्टरों के मुताबिक इस बार सबसे अधिक युवाओं की मौत हुई है. 500 में करीब 280 कोरोना मरीजों की मौत खून के थक्के जमने से हुई है. उनके फेफड़ों के साथ ब्रेन और हार्ट में थक्के पाये गये.

उन्हें निमोनिया, एआरडीएस व हाइपोथायराडिज्म जैसी बीमारियों से भी जूझना पड़ा. वहीं, करीब 150 मरीजों में लंग इन्फेक्शन पाया गया, जिससे सांस लेने में तकलीफ हुई और भर्ती होने के दो से तीन दिनों के अंदर ही उनकी मौत हो गयी.

1052 मृत कोरोना मरीजों में 650 थे युवा

डेथ ऑडिट रिपोर्ट की मानें तो इस बार म्यूटेंट वायरस ने मरीजों के फेफड़ों को अधिक नुकसान पहुंचाया है. वायरस का असर इतना जोरदार था कि मरीजों के फेफड़ संक्रमण के पांच दिन बाद ही क्षतिग्रस्त हो गये.

इन इन मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में अब तक मरनेवाले 1052 कोरोना मरीजों में 650 युवा थे. इनमें पीएमसीएच में मासूम बच्ची की मौत भी शामिल है. बाकी 402 मरीजों की उम्र 60 से 85 साल की बीच थी.

पहली लहर में मौत के लिए दूसरी गंभीर बीमारियांं अधिक जिम्मेदार थीं

पिछले साल कोरोना की पहली लहर में पटना जिले में सबसे अधिक मौत एम्स में हुई थी. एम्स में सबसे अधिक कोरोना मरीजों का इलाज भी किया गया था. एम्स ने बीते साल भी मौतों का डेथ ऑडिट किया था, जिसमें मौतों का कारण डायबिटीज, हृदय रोग, बीपी, किडनी समेत अन्य कई बीमारियों को जिम्मेदार बताया गया था. खून के थक्के व लंग्स का इन्फेक्शन उन मरीजों में मिला, जो इन बीमारियों के कारण गंभीर रहे और 10 दिन तक उनका इलाज भी चलता रहा.

पटना एम्स के कोविड नोडल पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार ने कहा कि एम्स में कोरोना से मरने वाले मरीजों का डेथ ऑडिट रोजाना किया जा रहा है. अब ब्लैक फंगस के मरीजों का भी ऑडिट किया जा रहा है. एम्स में सबसे अधिक खून के थक्के जमने के साथ-साथ लंग्स इन्फेक्शन के कारण मौतें हुई हैं. इनमें कम उम्र से लेकर सभी उम्र वर्ग के लोग शामिल हैं. संक्रमण फेफड़े के साथ रक्त कोशिकाओं से भी जुड़ा हुआ है.

आइजीआइएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल ने कहा कि अप्रैल व मई में भर्ती हुए कोरोना मरीजों में सबसे अधिक खून के थक्के जमने के मामले सामने आये थे. इससे उनके फेफड़े पांच से सात दिनों में ही संक्रमित हो जाते थे. कई गंभीर मरीजों को ठीक कर डिस्चार्ज भी किया गया. जो मरीज पहले से गंभीर अवस्था में आये और उनके खून में थक्के जमे थे, उनकी मौत हो गयी.

Posted by Ashish Jha

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