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3 साल में 30 करोड़ के दुरुपयोग का खुलासा, मगध विवि के वीसी के ठिकानों पर छापे, घर से 2 करोड़ कैश बरामद

Bihar News बोधगया स्थित मगध विवि के अलावा आरा स्थित वीर कुंवर सिंह विवि के कुलपति रहते हुए उन्होंने सभी नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
तीन साल में 30 करोड़ के दुरुपयोग का खुलासा
तीन साल में 30 करोड़ के दुरुपयोग का खुलासा
Representational Pic

पटना. मगध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ (प्रो) राजेंद्र प्रसाद के बोधगया व गोरखपुर के अलावा उनके करीबी के लखनऊ स्थित ठिकानों पर बुधवार को विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने एक साथ छापेमारी की. उनके खिलाफ जालसाजी और आय से अधिक संपत्ति (डीए) का मामला एसवीयू ने दर्ज किया है. छापेमारी के दौरान उनके गोरखपुर स्थित मकान से एक करोड़ से ज्यादा की जमीन के कागजात, दो करोड़ कैश, करीब तीन लाख की विदेशी मुद्राएं और लगभग 20 लाख के गहने बरामद किये गये. इन विदेशी मुद्राओं में अमेरिकी डॉलर, यूरो, पाउंड व येन शामिल हैं. एक करोड़ से ज्यादा की जमीन के जो कागजात जब्त किये गये हैं, उनका बाजार मूल्य इससे करीब 10 गुना ज्यादा है.

वहीं, बोधगया स्थित उनके सरकारी आवास और कार्यालय से बड़ी संख्या में कागजात मिले हैं, जिनसे कई स्तर पर धांधली या जालसाजी के प्रमाण मिले हैं. अब तक की जांच में यह बात सामने आयी कि कुलपति ने अपने करीब तीन साल के कार्यकाल के दौरान 30 करोड़ रुपये की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया है. आय से अधिक संपत्ति के मामले में किसी मौजूदा कुलपति के ठिकानों पर एसवीयू के स्तर से यह पहली छापेमारी है. बोधगया स्थित मगध विवि के अलावा आरा स्थित वीर कुंवर सिंह विवि के कुलपति रहते हुए उन्होंने सभी नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से सरकारी राशि का दुरुपयोग किया. उन पर बिना किसी नियम-कायदे का पालन करते हुए उत्तर पुस्तिका की छपाई से गार्ड की प्रतिनियुक्ति तक में पैसे की उगाही के आरोप हैं.

पीपीयू के रजिस्ट्रार की भी मिलीभगत

सरकारी राशि गबन के मामले में मगध विवि के कुलपति डॉ प्रसाद के अलावा उनके पीए सह सहायक सुबोध कुमार, वीर कुंवर सिंह विवि के वित्तीय पदाधिकारी ओम प्रकाश, पटना के पाटलिपुत्र विवि के रजिस्ट्रार जितेंद्र कुमार के अलावा लखनऊ के डाली बाग इलाके के तिलक मार्ग में मौजूद मेसर्स पूर्वा ग्राफिक्स एंड ऑफसेट प्रिंटर्स और मेसर्स एक्सएलआइसीटी सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड को भी दोषी पाते हुए इनके खिलाफ एफआइआर दर्ज की गयी है.

फिलहाल इन सभी लोगों से सिर्फ शुरुआती पूछताछ की गयी है. लखनऊ स्थित इन दोनों कंपनियों के असली मालिक कौन हैं, इसका खुलासा बरामद दस्तावेजों की जांच के बाद होगा. अब तक की जांच में यह पता चला है कि पूर्वा ग्राफिक्स कंपनी में वीर कुंवर सिंह विवि के वित्तीय पदाधिकारी ओम प्रकाश का शेयर है. हालांकि, इससे जुड़े तमाम दस्तावेजों की जांच के बाद ही इसकी पुष्टि होगी.

27 सितंबर, 2019 से एमयू के हैं वीसी

डॉ (प्रो) राजेंद्र प्रसाद 27 सितंबर, 2019 से मगध विवि, बोधगया के कुलपति हैं. कुछ दिन समय के लिए वह वीर कुंवर सिंह विवि, आरा के प्रभारी कुलपति भी थे. इससे पहले 17 जून, 2016 से 25 जून 2019 तक प्रो राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज के संस्थापक कुलपति रहे थे.

भुगतान के लिए करीबियों को करवाया पदस्थापित

पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि डॉ राजेंद्र प्रसाद ने मगध विवि के तत्कालीन वित्तीय पदाधिकारियों पर गलत ढंग से भुगतान करने का काफी दवाब डाला, तो उन अधिकारियों ने गलत करने से इन्कार कर दिया. इस पर वीसी ने अपने करीबियों को अपनी रसूख की बदौलत विवि में पदस्थापित करवा लिया और फिर अपनी इच्छा के अनुसार भुगतान करवा लिया.

47 गार्ड तैनात, पर 86 के वेतन की निकासी

जांच में यह बात सामने आयी कि मगध विवि परिसर में 47 गार्ड कार्यरत हैं, जबकि कागज पर 86 गार्ड की तैनाती दिखायी गयी है और इसके आधार पर ही पैसे की निकासी की गयी है. इसके अलावा गार्डों को जितना वेतन दिया जाता है, उससे कहीं ज्यादा राशि की निकासी वेतन के तौर पर होती है.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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Published Date

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