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आपूर्ति घटी तो बिहार में बढ़ी लोडशेडिंग, बिजली कंपनी ने केंद्र सरकार को आपूर्ति बढ़ाने को लिखी चिट्ठी

बिजलीघरों में कोयले की कमी का असर सूबे की बिजली आपूर्ति पर दिखने लगा है. इसकी वजह से त्योहारी सीजन में लोगों को लोडशेडिंग की मार झेलनी पड़ रही है. ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों में हर चार से पांच घंटे पर एक से आधे घंटे की बिजली कटौती हो रही है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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बिजली
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फाइल फोटो.

Bihar News: बिजलीघरों में कोयले की कमी का असर सूबे की बिजली आपूर्ति पर दिखने लगा है. इसकी वजह से त्योहारी सीजन में लोगों को लोडशेडिंग की मार झेलनी पड़ रही है. ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों में हर चार से पांच घंटे पर एक से आधे घंटे की बिजली कटौती हो रही है. वीआइपी इलाकों को छोड़ दें, तो अधिकतर मुहल्लों में रोटेशन के आधार पर बिजली मिल रही है. सूबे को अभी औसतन छह हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता है, लेकिन उसके अनुपात में 4500 से 5000 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही है. त्योहार में बिजली की बढ़ी मांग को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय से आवंटन बढ़ाने की मांग करते हुए पत्र लिखा है.

दरअसल बारिश के समय खदान से कोयले की निकासी बंद हो जाने से आपूर्ति में कमी हो जाती है. ऐसे में बिजलीघरों को आवश्यकता से कम मात्रा में ही कोयले का स्टॉक मिल पा रहा है. सीजन को ध्यान में रखते हुए एनटीपीसी की बाढ़ की एक यूनिट की मरम्मत का काम किया जा रहा है. राज्य सरकार ने कांटी की दो यूनिटों से पहले ही बिजली की खरीद बंद कर रखी है. कहलगांव यूनिट से भी बिजली की आपूर्ति घटी है.

ऐसे में एनटीपीसी की यूनिट से ही बिहार को कम बिजली मिल रही है. बिजली कंपनी के मुताबिक बिहार को एनटीपीसी से 4500 मेगावाट बिजली के मुकाबले 3000 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही है. इसी तरह, निजी कंपनियों से 688 मेगावाट के मुकाबले 347 मेगावाट ही मिल रहा है. पवन ऊर्जा से 580 मेगावाट के विरुद्ध केवल लगभग 100 मेगावाट बिजली ही मिल रही है. एनटीपीसी का दावा है कि उनके पास फिलहाल कोयले का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.

निजी कंपनियों ने 20 रुपये यूनिट तक बढ़ायी बिजली दर

वहीं, बाजार में बिक्री के लिए बिजली की उपलब्धता कम रहने से निजी कंपनियों ने भी बिजली दर बढ़ा दी है. इसकी दर 20 रुपये प्रति यूनिट तक चली गयी है और बोली लगाने पर भी पूरी मात्रा में बिजली नहीं मिल पा रही है. इसलिए दुर्गा पूजा को ध्यान में रखते हुए बिजली कंपनियों ने बाजार से अधिक दर पर भी बिजली खरीदने हेतु बोली लगाने का निर्णय लिया है. त्योहार के दौरान बाजार से खरीद कर बिजली की यथासंभव उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी. सूत्रों के मुताबिक निजी कंपनियां इंपोर्टेड कोयले का इस्तेमाल करती हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस कोयले की कीमत बढ़ने का हवाला देते हुए उन्होंने बिजली के दाम बढ़ा दिये हैं.

मंत्रालय कोयले की उपलब्धता बढ़ाने का कर रहा प्रयास

बिजली कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि विद्युत मंत्रालय भारत सरकार के स्तर पर कोयला मंत्रालय से संपर्क कर कोयले की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. मॉनसून के समाप्ति की ओर होने से कोयले की खुली खदानों में अब खनन में बढ़ोतरी हो रही है. साथ ही विदेशों से कोयला मंगाने की मंजूरी की भी सूचना प्राप्त हुई है. दो-तीन दिन में स्थिति बेहतर होने की संभावना बतायी जा रही है.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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