खान सर को कोर्ट से राहत, 20 जून तक नहीं होगी गिरफ्तारी, अदालत ने रखी शर्त
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 09 Jun 2026 9:51 PM
फैसल खान की 20 जून तक नहीं होगी गिरफ्तारी
Khan Sir Controversy: पटना में दर्ज फायरिंग मामले में खान ग्लोबल स्टडीज के निदेशक खान सर उर्फ फैसल खान को अदालत से 20 जून तक अंतरिम राहत मिली है. कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है. ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद की जमानत याचिका खारिज कर दी गई.
Khan Sir Controversy: खान ग्लोबल स्टडीज के निदेशक खान सर उर्फ फैसल खान को पटना के प्रधान जिला जज की अदालत ने मंगलवार को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर 20 जून तक के लिए रोक लगा दी है. अदालत ने फैसल खान को यह आदेश दिया है कि वे पुलिस को जांच में मदद करेंगे. पुलिस जब भी उन्हें बुलायेगी, हाजिर होना होगा. दूसरी ओर खान ग्लोबल स्टडीज के गार्ड चुनचुन कुमार के साथ मारपीट कर सिर फोड़ने के मामले में दर्ज केस में अभियुक्त बनाये गये ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद की नियमित जमानत याचिका को अदालत ने खारिज कर दी है.
वकील ने अदालत में बताया निर्दोष
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रुपेश देव की अदालत में खान सर की ओर से मामले में दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर करीब एक घंटे तक सुनवाई हुई. इस दौरान बहस करते हुए खान सर के वकील अरविंद कुमार मऊआर ने अपने मुवक्किल को निर्दोष बताते हुए उन्हें अग्रिम जमानत देने की प्रार्थना की. लेकिन सरकार की ओर से लोक अभियोजक राजेश कुमार ने विरोध किया.
अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद केस डायरी और खान सर के आपराधिक इतिहास की भी मांग पुलिस से की. अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद वकील अरविंद कुमार मऊआर ने अंतरिम राहत देने की प्रार्थना की. जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर 20 जून तक के लिए रोक लगा दी.
फैसल खान, उनके दो गार्ड प्रमोद कुमार व तालेबर सिंह के खिलाफ में पुलिस के बयान पर केस दर्ज किया गया है. यह मामला कोचिंग संस्थान के बाहर एक फायरिंग का वीडियो वायरल होने से जुड़ा है. 4 जून को कदमकुआं थाना में कांड संख्या 418/2026 दर्ज किया है.
ज्ञान बिंदु के निदेशक की जमानत याचिका कर दी गयी खारिज
खान ग्लोबल स्टडीज के गार्ड के साथ मारपीट करने के मामले में अभियुक्त बनाये गये ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रौशन आनंद की नियमित जमानत याचिका पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी अनुराग वर्मा की अदालत में सुनवाई हुई. इस दौरान रौशन आनंद के वकील राघव कुमार ने उन्हें जमानत दिये जाने की प्रार्थना की और अपने मुवक्किल को निर्दोष बताया. साथ ही उन्होंने अदालत में यह कहा कि इस मामले में धारा 109 लागू नहीं होती है. पीड़ित को लगी चोट साधारण है. रौशन आनंद के वकील के दिये गये तर्क को अदालत ने सही नहीं माना और उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दी.
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पुलिस की केस डायरी क्या खान सर के अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करा पायेगी
अदालत ने पुलिस को फैसल खान पर लगे आरोपों को लेकर केस डायरी भेजने का आदेश दिया है. पुलिस के पास 10-12 दिन का समय है. इस दौरान फैसल खान पर लगे आरोपों के संबंधित सबूतों और गवाहों के बयान जुटा लेना होगा. पुलिस डायरी में साक्ष्य मजबूत नहीं होंगे तो खान सर की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर हो सकती है.
प्राथमिकी में पुलिस ने बताया है कि दोनों गार्ड प्रमोद कुमार और तालेबर सिंह ने बयान में कहा है कि खान सर के ही कहने पर उन्होंने फायरिंग की थी. यह आदेश खान सर ने दिया था या नहीं, इसे पुलिस कैसे सिद्ध करेगी? पुलिस के पास केवल दोनों गार्ड के बयान हैं. इसके अलावा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है. गार्ड बयान से मुकर सकते हैं. पुलिस इस केस में और भी गवाहों के नाम जोड़ सकती है.
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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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