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जमालपुर स्क्रैप घोटाला: इंजीनियर चंदेश्वर यादव की संपत्ति जब्त, नहीं दे पाए खाते में जमा पैसों का हिसाब

पटना जमालपुर स्थित पूर्व रेलवे वर्कशॉप में हुए करोड़ों के स्क्रैप घोटाले के मुख्य आरोपित सीनियर सेक्शन इंजीनियर चंदेश्वर प्रसाद यादव की करोड़ों की संपत्ति इडी ने जब्त कर ली. इडी ने मंगलवार को उनके सभी ठिकानों पर एक साथ रेड कर इन्हें सील कर दिया.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
जमालपुर स्क्रैप घोटाला
जमालपुर स्क्रैप घोटाला
सोशल मीडिया

पटना जमालपुर स्थित पूर्व रेलवे वर्कशॉप में हुए करोड़ों के स्क्रैप घोटाले के मुख्य आरोपित सीनियर सेक्शन इंजीनियर चंदेश्वर प्रसाद यादव की करोड़ों की संपत्ति इडी ने जब्त कर ली. इडी ने मंगलवार को उनके सभी ठिकानों पर एक साथ रेड कर इन्हें सील कर दिया. इडी ने उनकी जो चल-अचल संपत्ति जब्त की है, उसका सरकारी मूल्य तीन करोड़ 98 लाख से ज्यादा है, जबकि इसका बाजार मूल्य इससे कई गुना ज्यादा है.

जांच के दौरान उनकी पत्नी उर्मिला देवी और बेटे भारत भूषण व शशिभूषण के नाम भी काफी अवैध संपत्ति मिली है. इस कारण इन्हें भी इस मामले में आरोपित बनाया गया है. इडी के स्तर से पीएमएलए के तहत की गयी इस कार्रवाई में उनके दो मकान और आधा दर्जन से ज्यादा प्लॉट समेत अन्य सभी संपत्ति को जब्त कर लिया गया है.

जो संपत्ति जब्त की गयी है, उसमें पटना के गर्दनीबाग में मौजूद मकान, महनार स्थित घर के अलावा हाजीपुर और दलसिंहसराय में प्लॉट के करीब चार कागजात शामिल हैं. ये सभी मकान पत्नी के नाम से हैं, जबकि प्लॉट बेटों के नाम पर हैं. इन अचल संपत्ती की सरकारी कीमत करीब एक करोड़ 20 लाख आंकी जा रही है. जांच के दौरान सात म्यूचुअल फंड में 35.85 लाख से ज्यादा का निवेश, 1.64 करोड़ से ज्यादा के 29 फिक्स डिपॉजिट के कागजात और करीब आठ लाख की चार बीमा पॉलिसी मिली है.

इसके अलावा दर्जन भर से ज्यादा बैंक खातों में उसकी पत्नी और बेटों के नाम से 17.25 लाख रुपये जमा हैं. फिलहाल इन सभी संपत्ति की शुरुआती स्तर पर जब्ती की गयी है. इसके बाद इडी की नयी दिल्ली स्थित एड्जुकेटिंग ऑथिरिटी से आदेश पारित होने के बाद इसे अंतिम रूप से जब्त कर लिया जायेगा.

खाते में आये 2.37 करोड़ का हिसाब नहीं बता पाये

अब तक की जांच यह पता चला कि इस वर्कशॉप में 34 करोड़ से ज्यादा का घोटाला हुआ है. इसमें चंदेश्वर प्रसाद यादव और उनके परिवार के बैंक खातों में 2.37 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा हुए. इडी की दर्जन बार से ज्यादा हुई पूछताछ में न वह स्वयं और न ही उनके परिवार का कोई सदस्य ही इस राशि के वैध स्रोत के बारे में किसी तरह की जानकारी दे पाया. रेलवे के इस बेहद अहम वर्कशॉप में बड़े स्तर पर हुई धांधली और कई महंगे सामान की चोरी से संबंधित मामले को सीबीआइ ने कुछ समय पहले जांच कर दर्ज की थी.

मुख्य भूमिका निभाने वाली पटना स्थित कंपनी श्री महारानी स्टील के मालिक देवेश कुमार के साथ लेन-देन से जुड़े दर्जनों साक्ष्य मिले हैं. इसी कंपनी के साथ मिलकर इन लोगों ने रेलवे के करोड़ों के स्क्रैप को लाखों में बेच कर लाखों की दलाली खायी. देवेश कुमार ने घूस के पैसे बैंक में जमा करने के अलावा फिक्स डिपॉजिट, बॉड या इंश्योरेंस पॉलिसी के रूप में दिये हैं.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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