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Bihar News: एनआइटी पटना में इसरो का सेंटर हुआ स्थापित, प्रॉब्लम सॉल्विंग रिसर्च पर होगा काम

Bihar News एमओयू साइन करने के बाद सीबीपीओ, इसरो के डायरेक्टर सुधीर कुमार एन ने कहा कि एनआइटी पटना का बेहतर प्रदर्शन और एमएचआरडी की रैंकिंग की वजह से इस सेंटर को यहां स्थापित किया जा रहा है.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
एनआइटी पटना में इसरो का सेंटर हुआ स्थापित
एनआइटी पटना में इसरो का सेंटर हुआ स्थापित
प्रभात खबर

Bihar News: इसरो बेंगलुरु ने एनआइटी पटना में अपना रिसर्च सेंटर ‘रीजनल एकेडमिक सेंटर फॉर स्पेस’ (आरएसीएस) स्थापित किया है. स्पेस रिसर्च को लेकर बुधवार को एनआइटी पटना और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशनइसरो बेंगलुरु के साथ एक एमओयू साइन हुआ है. एमओयू साइन करने के बाद सीबीपीओ, इसरो के डायरेक्टर सुधीर कुमार एन ने कहा कि एनआइटी पटना का बेहतर प्रदर्शन और एमएचआरडी की रैंकिंग की वजह से इस सेंटर को यहां स्थापित किया जा रहा है. पूरे जोन के रिसर्च प्रोजेक्ट अब एनआइटी पटना के माध्यम से पूरे किये जायेंगे.

उन्होंने कहा कि पूरे जोन में हमें एनआइटी पटना से बेहतर संस्थान कोई और नहीं मिला. अब हमें रिसर्च के मामले में भी पुराने तरीके की सोच से आगे निकलकर प्रैक्टिकल तरीके से सोचना होगा. यानी प्रॉब्लम सॉल्विंग रिसर्च पर काम होगा. अब रिसर्च में भी इनोवेशन को लाना होगा. आउट ऑफ द बॉक्स सोचना होगा. मुझे पूरी उम्मीद है कि एनआइटी पटना की भागीदारी अच्छी होगी. हमें आने वाली जेनरेशन के लिए आज से ही नींव रखनी होगी, नहीं तो आने वाली जेनरेशन हमें माफ नहीं करेगी.

एनआइटी पटना के निदेशक प्रो पीके जैन ने कहा कि इस सेंटर की स्थापना के साथ पटना पूर्वी क्षेत्र में अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए मेंटर संस्थान बन जायेगा. इसरो के एसोसिएट डायरेक्टर, रिस्पॉन्स एंड एआइ सीबीपीओ के डॉ एमए पॉल ने कहा कि रीजनल एकेडमिक सेंटर फॉर स्पेस की स्थापना से स्पेस में केवल भारतीय प्रोडक्ट का उपयोग होगा.

रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए स्टूडेंट्स दे सकेंगे आइडिया

बीटेक, एमटेक और पीएचडी के स्टूडेंट्स भी रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए आइडिया दे सकेंगे. वे अपने प्रोजेक्ट आइडिया फैकल्टी के माध्यम ही जमा करेंगे, ताकि अगर वे कॉलेज से निकल भी जाएं, तो प्रोजेक्ट न रुके. दो तरह के प्रोजेक्ट होंगे. शॉर्ट टर्म प्रोजेक्ट एक साल के व एंड डी प्रोजेक्ट एक साल से ज्यादा के होंगे. एनआइटी पटना के डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रो मनपुरन महतो ने कहा कि पिछले एक साल से वह और उनकी टीम टाइअप करने में लगे थे. पिछले साल ऑनलाइन विजिट के माध्यम से एनआइटी का सर्वेक्षण किया गया.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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