विधि संवाददाता, पटना
हाइकोर्ट ने स्थानीय निकायों के शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति नानी तागिया की एकलपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता कुमार गौरव व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया,साथ ही हाइकोर्ट ने सरकार को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि शिक्षकों की जिला स्तर पर नियुक्ति उनके योगदान के अनुपात में हो.वरीय अधिवक्ता आशीष गिरी और अधिवक्ता सुमित कुमार झा ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता शिक्षक वर्ष 2012 की नियमावली के तहत नियुक्त किये गये थे. वर्ष 2023 में सरकार ने नई नियमावली- बिहार स्कूल एक्सक्लूसिव शिक्षक नियमावली, 2023 जारी की, जिसमें स्थानीय निकाय शिक्षकों को “एक्सक्लूसिव शिक्षक” के रूप में नियुक्त करने से पहले एक दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया. 25 जनवरी 2024 को जारी विज्ञापन के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा दी, सफल हुए और उनकी काउंसलिंग व दस्तावेज सत्यापन भी हो गया. इसके बाद 20 नवंबर 2024 को उन्हें अस्थायी नियुक्ति पत्र जारी किए गए, जो उनके वरीयता और मेरिट के आधार पर थे लेकिन बाद में नियमों में संशोधन कर नियुक्ति पत्र रद्द कर दिए गए और उन्हें पूर्ववर्ती स्कूलों में योगदान देने को कहा गया. याचिकाकर्ताओं ने इसे उनके वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
