Indian Railways: ट्रेन के इंस्टेंट टिकट सिस्टम से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही शिकायतों, लंबी लाइनें, अव्यवस्था और धोखाधड़ी से होने वाली परेशानी का समाधान निकाल लिया गया है. सोनपुर डिवीजन की ओर से तत्काल टिकट के लिए ‘क्यू-मित्र’ की शुरुआत की गई है. इससे टिकट प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और तनावमुक्त हो गई है.
कैसे काम करता है क्यू-मित्र?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, क्यू-मित्र पूरी तरह से मशीन बेस्ड और ऑटोमेटिक प्रणाली है. इसमें यात्री आधार-आधारित सत्यापन और चेहरे की पहचान का उपयोग करके सेल्फ-सर्विस कियोस्क के माध्यम से टोकन प्राप्त करते हैं. टोकन पर यात्री की फोटो, सीरियल नंबर और समय डिस्प्ले होता है, जबकि लाइन की स्थिति डिजिटल डिस्प्ले पर दिखाई देती है.
क्यू-मित्र से हो रहा ये फायदा
यह सिस्टम हर एक आधार कार्ड को हर दिन एक टोकन तक सीमित करती है, जिससे दलाली और धोखाधड़ी वाली बुकिंग पर अंकुश लगता है. इस सिस्टम के लागू होने के बाद से स्टेशनों पर भीड़भाड़, धक्का-मुक्की और विवादों में काफी कमी आई है. एक और खास बात यह भी है कि इस पूरी प्रक्रिया में कर्मचारियों की भूमिका बेहद लिमिटेड कर दी गई है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी की संभावना लगभग खत्म हो जाती है.
क्या कहना है यात्रियों और रेलवे का?
नए सिस्टम को लेकर यात्रियों का कहना है कि अब उन्हें बिना किसी सिफारिश या परेशानी के निष्पक्ष रूप से इंस्टेंट टिकट मिल रहे हैं. रेलवे का कहना है कि क्यू-मित्र सिस्टम पिछले 13 दिनों से सफलतापूर्वक चल रही है और यात्रियों से इसे लेकर बेहद पॉजिटिव प्रतिक्रिया मिली है. सोनपुर डिवीजन ने इसे डिजिटल इंडिया और स्मार्ट रेलवे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है और भविष्य में इस तरह की तकनीकी पहलों का विस्तार करने की मंशा व्यक्त की है.
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