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बिहार में नये सिरे से गन्ना क्षेत्र निर्धारित करने की कवायद शुरू, चीनी मिलों को 656 लाख क्विंटल गन्ने की जरूरत

प्रदेश में संचालित की जा रही चीनी मिलों के लिए वर्ष 2021-22 सत्र के लिए 656. 97 लाख क्विंटल गन्ने की जरूरत होगी. गन्ना उद्योग विभाग ने इसके लिए चीनी मिलवार गन्ने की अपेक्षित मात्रा निर्धारित कर दी है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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गन्ना
गन्ना
फाइल

पटना. प्रदेश में संचालित की जा रही चीनी मिलों के लिए वर्ष 2021-22 सत्र के लिए 656. 97 लाख क्विंटल गन्ने की जरूरत होगी. गन्ना उद्योग विभाग ने इसके लिए चीनी मिलवार गन्ने की अपेक्षित मात्रा निर्धारित कर दी है. इधर, प्रदेश में नये सिरे से गन्ना क्षेत्र निर्धारित करने की कवायद शुरू हो चुकी है.

दरअसल गन्ना उद्योग विभाग ने माना है कि इतनी मात्रा में गन्ना मिल जाता है, तो चीनी मिलें पूरे सत्र में बेहतर पेराई कर सकती हैं. गन्ना उद्योग विभाग के इखायुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने इस संदर्भ में जरूरी दिशा -निर्देश जारी कर दिये हैं.

इधर, प्रदेश में जीपीएस के जरिये पेराई सत्र 2021-22 के लिए चीनी मिलों की तरफ से जीपीएस सर्वेक्षण किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक अब तक करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया है. दरअसल बाढ़ की वजह से इस सर्वेक्षण में बाधा आ रही है.

इधर, प्रदेश में गन्ना विकास के लिए इस साल 28.50 करोड़ का प्रावधान किया गया है. एक अन्य जानकारी में बताया गया कि कुछ एक चीनी मिलों के दायरे में आने वाले किसानों की संख्या और किसानों से प्राप्त बैंक खाता में काफी भिन्नता है. लिहाजा इसमें सुधार कराने की बात कही जा रही है.

इस दिशा में उद्योग विभाग अपेक्षित कदम उठा रहा है. गन्ना सर्वेक्षण नीति 2021 में गन्ना उद्योग विभाग ने खास संशोधन किये हैं. संशोधन के मुताबिक गन्ना सर्वेक्षण में उसी किसान का नाम अंकित किया जायेगा, जो उस खेत में गन्ने की खेती कर रहा है.

इसके अलावा राजस्व अभिलेखों में भूमि अंकित हो एवं जिनके द्वारा उक्त खेत में गन्ने की खेती की गयी है. अथवा जो उस भूमि में हिस्सेदार हो. हालांकि अगर भू-स्वामी , रेल ,राजस्व वन एवं सिंचाई विभाग की तरफ से दिये प्रमाण पत्र प्रस्तुत किये जाने पर बोये गये गन्ने का सर्वेक्षण पट्टेदार के नाम किया जायेगा.

Posted by Ashish Jha

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