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बिहार विधानसभा चुनाव 2020: बिहार चुनाव में वंशवाद की गहरी पैठ, सभी दलों में परिजनों को टिकट देने की होड़

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
सांकेतिक फोटो
सांकेतिक फोटो
File

अनिकेत त्रिवेदी,पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. देश भर के चुनावों में वंशवाद एक बड़ा ही गंभीर मुद्दा रहा है. बीते तीन-चार चुनावों में विभिन्न पार्टियों में टिकट बंटवारे की स्थिति देखें, तो बिहार की राजनीति में वंशवाद की पैठ गहरी होती दिख रही है. राजद, लोजपा आदि पार्टियां तो वंशवाद की वाहन बनी हुई हैं, लेकिन भाजपा, जदयू व कांग्रेस भी इससे अछूते नहीं हैं.

पिछले चुनाव में लगभग 35 राजनीतिक परिवारों से 44 उम्मीदवार

पिछली बार के बिहार विधानसभा चुनाव में लगभग 35 राजनीतिक परिवारों से 44 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे. इसमें भाजपा के लगभग 10, लोजपा की तरफ से छह, राजद की तरफ से तीन, हम की ओर से तीन उम्मीदवारों को चुनावी मैदान दिया गया था. ऐसे में इस बार देखना काफी दिलचस्प होगा कि कौन पार्टी कितनी सीटों पर वंशवाद के आधार पर टिकट देती है?

राजद में लालू परिवार की रही चर्चा

कुछ सीटों पर वंशवाद को लेकर काफी चर्चा रही. उनमें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बेटों की भी थी. तेज प्रताप यादव राजद प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े बेटे ने महुआ क्षेत्र से हिंदुस्तान अवामी मोर्चा के रवींद्र राय को 28 के लगभग मतों के अंतर से हराया था. तेजस्वी यादव लालू के दूसरे बेटे ने 22 हजार मतों के अंतर से भाजपा के सतीश कुमार यादव को राघोपुर से हरा कर राजनीति में पहला कदम बढ़ाया था. वहीं लोकसभा के चुनाव में राजद की टिकट पर मीसा भारती ने भी चुनाव लड़ा था़, जो हार गयी थीं.

भाजपा में भी वंशवाद की लंबी फेहरिस्त

भाजपा में भी वंशवाद की लंबी फेहरिस्त है़ भाजपा के राणा रणधीर सिंह पूर्व सांसद सीताराम सिंह के बेटे हैं. उन्होंने भाजपा के टिकट से आरजेडी के शिवजी राय को हराया था. विवेक ठाकुर भाजपा के उपाध्यक्ष सीपी ठाकुर के बेटे हैं. उन्हें आरजेडी के शंभूनाथ यादव ने ब्रह्मपुर से हरा दिया था. इसके अलावा बांकीपुर से विधायक नितिन नवीन भी भाजपा नेता रहे नवीन किशोर सिन्हा के पुत्र हैं. भाजपा नेता गंगा प्रसाद के बेटे संजीव चौरसिया ने दीघा क्षेत्र से जदयू के राजीव रंजन को 92 हजार मतों से हराया था. भाजपा के मंत्री अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित सारस्वत भी चुनाव लड़ चुके हैं. छेदी पासवान के बेटे रवि पासवान आदि कई नाम वंशवाद राजनीति से जुड़े हैं.

लोजपा वंशवाद की राजनीति पर ही केंद्रित

रामविलास पासवान द्वारा स्थापित लोक जनशक्ति पार्टी की वंशवाद की राजनीति पर ही केंद्रित है़ वर्तमान में लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान हैं. प्रिंस राज स्व रामचंद्र पासवान के बेटे व लोजपा के संस्थापक अध्यक्ष रामविलास पासवान के भतीजे हैं. वहीं, रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस अपने गढ़ अलौली से आरजेडी के चंदन कुमार से 240470 मतों से हार गये थे.

हम में भी परिवारवाद का प्रवेश 

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र भी पिता के साथ राजनीति कर रहे हैं. हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन कांग्रेस के राजेश कुमार से हार गये थे.

जदयू के कई नेता परिवारवाद की उपज

जदयू नेता व मंत्री महेश्वर हजारी पूर्व विधायक रामसेवक हजारी के बेटे रहे हैं. हाल में ही जदयू में शामिल हुए तीन विधायक चंद्रिका राय, जयवर्धन यादव, फराज फातमी भी वंशवाद राजनीति की उपज हैं. चंद्रिका राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व दारोगा राय के पुत्र हैं. वहीं, जयवर्धन यादव स्व राम लखन सिंह यादव के पोते हैं. स्व रामलखन सिंह यादव को शेर-ए-बिहार कहा जाता था़ इसके अलावा फराज फातमी पूर्व केंद्रीय मंत्री व दरभंगा से सांसद रहे एएएम फातमी के पुत्र हैं.

कांग्रेस में भी वंशवाद हावी रहा

कांग्रेस में भी वंशवाद हावी रहा है़ बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा पूर्व मंत्री नागेंद्र झा के बेटे हैं. कांग्रेस के बिहार कार्यकारी अध्यक्ष अशोक कुमार पूर्व मंत्री बालेश्वर राम के बेटे हैं. विधायक भावना झा कांग्रेस नेता रहे योगेश्वर झा की बेटी हैं. विधायक राजेश कुमार दिलेश्वर राम के पुत्र हैं. कार्यकारी अध्यक्ष समीर सिंह आदि कई नेता वंशवाद की ही उपज हैं.

वंशवाद की वाहक बनी लोजपा व राजद

भले ही भाजपा, जदयू के कई नेता वंशवाद की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हों, लेकिन लोजपा और राजद बिहार वंशवाद राजनीति के वाहक रहे हैं. राजद में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के पुत्र तेजस्वी यादव ही अब पार्टी में सब कुछ संभाल रहे हैं. इसके अलावा पुत्र तेज प्रताप और पुत्री मीसा भारती भी राजनीति में हैं. इसके अलावा लोजपा में अब रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान ही राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. उनके साथ उनके चचेरे भाई भी सांसद बन चुके हैं.

इस बार भी लड़ेंगे कई ऐसे उम्मीदवार

इस बार के चुनाव में वंशवाद की राजनीति करने वाले कई चेहरे भी चुनाव लड़ेंगे. राजद की ओर से तेज प्रताप, तेजस्वी भी चुनाव लड़ सकते हैं. लोजपा से खगड़िया के सांसद महबूब अली कैसर अपने बेटे युसुफ सलाउद्दी के लिए सिमरी बख्तियारपुर चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे है. वैशाली की सांसद वीणा देवी अपनी बेटी कोमल सिंह के लिए गायघाट या मुजफ्फरपुर के किसी सीट पर जुगाड़ में लगी हुई हैं. इसके अलावा पूर्व सांसद सूरजभान सिंह अपने छोटे भाई कन्हैया के लिए मोकामा की सीट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं. वहीं , स्वर्गीय रामचंद्र पासवान के बड़े पुत्र कृष्ण राज भी रोसड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के मूड में है़ं संजीव चौरसिया, राणा रणधीर, नितिन नवीन आदि कई उम्मीदवार चुनाव की तैयारी कर रहे हैं.

Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya

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