चंडीगढ़ की बस सेवा कर देगी हैरान! नूडल बनने से पहले धुलती है पूरी बस, सरकारी सफर देता है सम्‍मान का एहसास

बिहार को भी पीएमई बस सेवा के तहत 400 बसें मिलने वाली हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, योजनाएं भी हैं लेकिन Chandigarh में जो मॉडल दिखा, वह सिर्फ बसों का नहीं पूरे सिस्टम का मॉडल है. अब सवाल यही है कि क्‍या बिहार में भी ऐसी व्यवस्था संभव है? क्‍या बसों की सेवा को यात्रा के सम्मान और सुविधा से जोड़ा जा सकता है?

चंडीगढ़ ISBT SEC 43 विजिट
Chandigarh Smart Bus System Electric Buses : सुबह का वक्त था. हल्की बारिश और फूही से मौसम में ठंडक थी और माहौल खुशनुमा था. वैसे तो मैं पहले भी पंजाब और चंडीगढ़ की यात्रा करता रहा हूं. मगर ये PIB का प्रेस टूर था. पटना से 8 अखबरों के पत्रकारों का दल ने ISBT Sector 43 Chandigarh विजिट करने पहुंचा था. इस विजिट के बाद यहां से निकलकर पत्रकारों के चेहरे पर हैरानी थी, उत्‍साह था आश्‍चर्य का वो भाव भी था कि क्‍या ये भारत में संभव है!

न गंदगी, न कुव्‍यवस्‍था केवल साफ सुथरी सेवा

जो बस स्‍टैंड हम विजिट कर रहे थे, वो हरियाली और पेड़ पौधों से घिरा था. इस ISBT से हजारों यात्री प्रतिदिन यात्रा करते हैं! ऐसा लग रहा था जैसे ये किसी की प्राइवेट प्रॉपर्टी हो. न सड़क पर गंदगी थी और न बस स्टैंड पर कुव्‍यवस्‍था. आइएसबीटी में दाखिल होते ही इस बात का एहसास हो गया था कि यह कोई साधारण बस अड्डा नहीं, बल्कि एक ‘सिस्टम’ है, जो अपने आप में एक मॉडल है. ये मॉडल पूरे देश के लिए एक उदाहरण है. यहां न अफरा-तफरी थी और न आपाधापी. सबसे खास बात सब नियमों के दायरे में स्‍वत: चल काम कर रहे थे.

जब बस अड्डा ‘अनुभव’ बन जाए

इस बस स्‍टैंड को देखकर हममें से कई पत्रकारों के मन में अनायास ही पटना के बस स्टैंड्स की तस्वीर उभर आई. जहां धूल, शोर, अव्यवस्थित दुकानें, सवारियों को भरने के लिए मारामारी और भी बहुत कुछ. जिसे यात्रा करने वाले अनावश्यक रूप से झेतले हैं. या कहें झेलने को मजबूर होते है. लेकिन चंडीगढ़ के इस ISBT का दृश्य पूरी तरह से विपरीत था. डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर हर बस का समय, रूट और प्लेटफार्म सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था. कंट्रोल रूम में लगी बड़ी स्क्रीन पर हर बस की लोकेशन लाइव ट्रैक हो रही थी. यह सब संचालित हो रहा था..एक अधिकारी ने मुस्कुराते हुए बताया, “यहां कोई बस बिना ट्रैकिंग के नहीं चलती… और देरी होने पर तुरंत कारण पता चल जाता है.” उन्होंने यह भी बताया कि बस में किसी को किसी तरह की समस्‍या हो तो भी तुरंत मदद भेजी या की जा सकती है. जिसकी मॉनिटरिंग लगातार की जाती है.

चंडीगढ़ पर सम्‍मान का रफ्तार

हम आगे बढ़े. हमें ए‍डमिट्रेटिव बिल्डिंग की ओर ले जा रहा था. जहां हमें चमचमाती इलेक्ट्रिक बसें नजर आईं. बस टर्मिनल के एक किनारे पर खड़ी नई चमचमाती इलेक्ट्रिक बसों की कतार ने सभी का ध्यान खींचा. करीब 40 बसें वहां मौजूद थीं. साफ सुथरी, बिल्कुल नई… जब हमने पूछा तो पता चला ये बसें परिचालन में हैं. इसी बीच बिना आवाज के हल्की सी सरसराहट के साथ हमारे पास अचानक एक बस आई और हमारे पास डोलती हुई रुकी. साथी पत्रकारों ने भी हंसते हुए कहा, ये बस है या मेट्रो का डिब्बा! आवाज ही नहीं है. 

बिहार में हो सकती है ऐसी व्यवस्था?

हालांकि बिहार को भी पीएमई बस सेवा के तहत 400 बसें मिलने वाली हैं. इसके लिए बिहार के प्रमुख शहरों में बस स्टैंड बनाए जा रहे हैं. लेकिन जो मॉडल चंड़ीगढ़ में देखने को मिला उसे देखकर ये लगा कि काश ऐसी बस सेवा बिहार में भी होती. वहीं, इतनी व्‍यवस्‍था देख कर मन में यह भी सवाल बरबस मन में उठे कि क्या बिहार में ऐसे बस सेवा शुरू हो सकती है! जो बस यात्रा को सम्मानजनक बनाएगा?

खासियत जो कर दे हैरान

खैर, इस बस की खासियत करीब से जानने का हमें जो मौका मिला, उसका हमने पूरा फायदा उठाया. ये लो-फ्लोर बसें थीं. जिसे इलेक्ट्रॉनिकली पूरी तरह से एक तरफ झुकाया (टिल डाउन) जा सकता था. ताकि विकलांगों को बस पर चढ़ने में कोई परेशानी न हो. जिसमें व्‍हील चेयर भी आसानी से चढ़ाने की व्यवस्था थी. एक पेडस्टल अंदर था! जिसे खोला जा सकता था. इसके बाद एक एक कर हमने इसके फीचर समझे. बस में जीपीएस और 7 कैमरे लगे थे. जो बस को अंदर और बाहर से कवर करते थे. जीपीएस सीधे सेटेलाइट से कनेक्ट थी. यानी स्टॉपेज आने या इलाके से गुजरने पर खुद ही यात्रियों को आउंसमेंट और एलईडी पर जानकारी दे रही थी. इतना ही नहीं अगर कोई बस एक ही रूट पर किसी कारणवश आ भी जाए तो इसकी जानकारी सीधे कंट्रोल रूम को हो जाती. और उसे तुरंत वहां से हटाने का आदेश दे दिया जाता.

गलती और चूक की गुंजाइश नहीं

परिचालन के दौरान बस से कोई दुर्घटना हो भी जाए तो गलती किसी? इसका पता लगाने के लिए यहां बहस और झगड़े की कोई गुंजाइश नहीं थी. बस के अंदर और बाहर की सारी गतिविधि पर कंट्रोल रूम के सदस्य लगातार निगाह बनाए रखते हैं. ताकि किसी तरह की स्थिति में तुरंत एक्शन लिया जा सके. बस में हेड काउंट करने वाले कैमरे और सेंसर भी लगे थे. ताकि कितने लोग चढ़े और कितने उतरे इसकी जानकारी भी कंट्रोल रूम को हो सके.

ऐसी सेवाओं वाली बस में यात्रा यात्री का सम्मान

इस बस के आराम के तो क्या ही कहने… इस एसी बस में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें, डिजिटल संकेत और अंदर लगी स्क्रीन ये बता रही थी कि इस बस में यात्रा करना सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि सुविधा और सम्मान है. इस बस को रुकवाने के लिए यात्री को चिल्‍लाने की भी जरूरत नहीं थी. इस बस में स्टॉप बटन लगे थे. जिसे दबाते ही ड्राइवर को बस रोकने का संकेत मिल जाता है. और बस बिना शोर किए रोक दी जाती है.

2 मिनट में धुलती बस! यकीन करना मुश्किल

सबसे ज्यादा चौंकाने वाला दृश्य था ऑटोमेटिक बस वॉशिंग सिस्टम था. जहां बस 2 मिनट में पूरी तरह से साफ सुथरी चकाचक हो जाती थी. वो भी टॉप से टायर तक! बस प्‍लेटफॉर्म पर खड़ा कर एक बटन दबाना होता है. चरणजीत बताते हैं कि बस की सफाई के लिए शैंपू और ब्रश सभी ऑटोमेटिक वर्क करते हैं. जो सफाई दो लोग मिल कर दो घंटे में करते हैं, वही काम ये मशीन 2 मिनट में करती है. यानी अगर आप नूडल बनाने चलें तो वो भी दो मिनट से ज्‍यादा का समय लेती है, मगर ये मशीन केवल दो मिनट में भारी भरकम पूरी की पूरी बस धोकर साफ कर देती है. इस मशीन की खासियत ये है कि इसमें लगे फेंस से न तो पेंट की चमक को कोई नुकसान होता है और न स्‍क्रैचेज आते हैं. इस मशीन के प्रयोग से पानी भी कम लगता है और इस पानी को रीसाइकल भी कर दिया जाता है. जो पर्यावरण का भी संरक्षण करता है.

क्या बिहार में ऐसा संभव है?

इस बस डिपो में बसों के चार्जिंग की व्यवस्था थी. जहां बसों को चार्ज किया जा रहा था. 2 घंटे में ये बस पूरी बस चार्ज हो जाती है. इसके बाद इस बस से 200 किलोमीटर की यात्रा की जा सकती है. अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे बस डीपो को आउटसोर्स कर दिया गया है. जो बस परिचालन से लेकर मेंटेनेंस तक सारा काम प्राइवेट कंपनी देख रही है. ऐसे में सवाल लाजमी है! क्या ये बिहार में संभव है?


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लेखक के बारे में

By Keshav Suman Singh

बिहार-झारखंड और दिल्ली के जाने-पहचाने पत्रकारों में से एक हैं। तीनों विधाओं (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब) में शानदार काम का करीब डेढ़ दशक से ज्‍यादा का अनुभव है। वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में बतौर डिजिटल हेड बिहार की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले केशव नवभारतटाइम्‍स.कॉम बतौर असिसटेंट न्‍यूज एडिटर (बिहार/झारखंड), रिपब्लिक टीवी में बिहार-झारखंड बतौर हिंदी ब्यूरो पटना रहे। केशव पॉलिटिकल के अलावा बाढ़, दंगे, लाठीचार्ज और कठिन परिस्थितियों में शानदार टीवी प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं। जनसत्ता और दैनिक जागरण दिल्ली में कई पेज के इंचार्ज की भूमिका निभाई। झारखंड में आदिवासी और पर्यावरण रिपोर्टिंग से पहचान बनाई। केशव ने करियर की शुरुआत NDTV पटना से की थी।

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