– वित्त आयोग के सामने दोहरायी मांग 16वें वित्त आयोग अध्यक्ष ने कहा-विशेष राज्य के दर्जे का अब नहीं कोई प्रावधान संवाददाता, पटना बिहार ने एक बार फिर केंद्रीय वित्त आयोग के सामने विशेष राज्य के दर्जे की मांग दोहरायी है. इसके पक्ष में राज्य की जनसांख्यिकीय, भौगोलिक और आर्थिक स्थिति के साथ 2013 में प्रकाशित रघुराम समिति की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है. इसमें देश के 10 पिछड़े राज्यों के साथ बिहार को एक पिछड़े राज्य के रूप में पहचाना गया था. रिपोर्ट में इसका भी उल्लेख किया गया था कि केंद्र सरकार सबसे पिछड़े राज्यों के विकास की गति बढ़ाने के लिए अन्य रूपों में केंद्रीय सहायता दे सकती है. हालांकि, बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर आयी 16वें वित्त आयोग की टीम का नेतृत्व कर रहे आयोग के अध्यक्ष डॉ अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि विशेष राज्य के दर्जे का अब कोई प्रावधान नहीं है. राज्य पर जनसंख्या का अधिक दबाव, अपर्याप्त विकास के लिए उत्तरदायी वित्त आयोग को दिये मेमोरंडम में राज्य सरकार ने बिहार सरकार की जाति आधारित गणना की रिपोर्ट उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की कुल आबादी 13 करोड़ से अधिक है. यह भारत की कुल जनसंख्या का 16% है. यह जनसंख्या भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 2.86% भाग पर निवास करती है. जनसंख्या की दृष्टि से बिहार का तीसरा स्थान है तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से 12वां स्थान है. बिहार का जनसंख्या घनत्व 1106 वर्ग किमी है, जो भारत के 382 वर्ग किमी से कहीं अधिक है. राज्य पर जनसंख्या का इतना अधिक दबाव इसके अपर्याप्त विकास के लिए उत्तरदायी है. बिहार प्रत्येक वर्ष बाढ़ से उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होता है. इस परिप्रेक्ष्य में बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की मांग सर्वाधिक अनुकूल है. बिहार का प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय की तुलना में काफी कम राज्य सरकार ने वित्त आयोग से कहा कि हाल के दशकों में बिहार की आर्थिक वृद्धि तीव्र गति से बढ़ी है, लेकिन इसकी प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय से काफी कम है. 2022-23 के त्वरित अनुमान के अनुसार बिहार की प्रति व्यक्ति आय 50,637 रुपये है, जो भारत की प्रति व्यक्ति आय 1.72 लाख से काफी कम है. इसलिए बिहार के लिए विशेष श्रेणी का दर्जा आवश्यक है, ताकि सामाजिक-आर्थिक विकास के मामले में राष्ट्रीय स्तर के साथ जुड़ सके. इसके अलावा 2023 में बिहार सरकार द्वारा जाति आधारित जनगणना के अनुसार सभी जातियों और श्रेणियों में 6,000 रुपये तक मासिक आय वाले गरीब परिवार हैं. जिनमें सामान्य वर्ग के 25.09%, पिछड़ा वर्ग के 33.16%, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के 33.58%, अनुसूचित जाति के 42.93% और अनुसूचित जनजाति की 42.70% आबादी गरीब है. वहीं, बिहार में लगभग 94 लाख अर्थात 34.13% गरीब परिवार हैं. इसको देखते हुए वित्त आयोग से अनुरोध है कि वह अपनी अनुशंसाओं में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए उपयुक्त मानदंड शामिल करे. —— ये रहे मौजूद वित्त आयोग बैठक में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा सह योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, पीएचइडी मंत्री नीरज कुमार सिंह, उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा, पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन, शिक्षा मंत्री सुनील कुमार, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री जनक राम, पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, नगर विकास एवं आवास मंत्री जिवेश कुमार, पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह, 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ अरविंद पनगढ़िया, 16वें वित्त आयोग के सदस्य अजय नारायण झा, एनी जॉर्ज मैथ्यू डॉ मनोज पांडा, डॉ शौम्य कांति घोष, ऋत्विक रंजन पांडेय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा, विकास आयुक्त प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ एस सिद्धार्थ, वित्त विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे.
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