Bihar NH Projects: बिहार में कई बड़े सड़क प्रोजेक्ट फिलहाल फंस गए हैं. कुल 26 नेशनल हाईवे परियोजनाओं पर काम रुकने की स्थिति बन गई है. वन विभाग की एक शर्त की वजह से केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने आ गए हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अगर 31 मई तक वन भूमि उपयोग की मंजूरी नहीं मिली, तो ये सभी प्रोजेक्ट रद्द भी किए जा सकते हैं.
इन परियोजनाओं के लिए करीब 711.92 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है. इनमें कई बड़े और अहम प्रोजेक्ट शामिल हैं. ये प्रोजेक्ट बिहार की कनेक्टिविटी और विकास के लिए काफी जरूरी माने जा रहे हैं, लेकिन मंजूरी नहीं मिलने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है.
सचिव की समीक्षा में क्या पता चला
सचिव वी. उमाशंकर ने इन परियोजनाओं की समीक्षा की थी. इसमें सामने आया कि बिहार का वन विभाग सड़क निर्माण के लिए वन भूमि देने में देरी कर रहा है. जबकि केंद्र सरकार की गाइडलाइन पहले से साफ है कि सड़क बनने के बाद भी जमीन वन भूमि ही मानी जाएगी और जहां पेड़ कटेंगे, वहां नए पौधे लगाने की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की होगी.
मामला इसलिए और उलझ गया है क्योंकि बिहार के वन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अलग तरीके से व्याख्या कर दी. विभाग ने शर्त रखी कि अगर वन भूमि का इस्तेमाल होगा तो उसके बदले गैर-वन भूमि भी देनी होगी. यही शर्त अब विवाद की जड़ बन गई है, क्योंकि बाकी राज्यों में ऐसा नियम लागू नहीं है.
बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें
पूरी सहमति नहीं बन पाई
केंद्र सरकार इस बात से नाराज है और उसने साफ कहा है कि कोई भी राज्य अपने स्तर पर अलग शर्त नहीं लगा सकता. इसी बीच बिहार वन विभाग ने नया आदेश जारी करते हुए कहा कि अभी मंजूरी दी जाएगी, लेकिन अगर भविष्य में कोर्ट का कोई नया आदेश आता है, तो एजेंसियों को गैर-वन भूमि देनी होगी.
इस मुद्दे पर अभी भी पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है. जिन परियोजनाओं पर असर पड़ा है, उनमें बरबीघा-शेखपुरा-जमुई, वाराणसी-कोलकाता हाईवे, भागलपुर-खैरा, दरभंगा-बनवारी पट्टी, मोहनियां-चौसा, आरा-सासाराम-पटना और पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं.
इसे भी पढ़ें: बिहार के इन जिलों में भारी बारिश और ओला गिरने की चेतावनी, मौसम विभाग ने जारी किया डबल अलर्ट
मुजफ्फरपुर SSP ने गायघाट थानेदार और सिपाही को किया सस्पेंड, जगतवीर राय मौत मामले में एक्शन
