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Bihar Election 2020 : सियासी पिच पर कई कद्दावर बोल्ड, नये चेहरों ने खेली मैच विनिंग पारी

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
श्रेयशी सिंह
श्रेयशी सिंह

पटना. पटना. बिहार विधानसभा चुनाव का परिणाम इस बार आइपीएल के परिणाम से अधिक रोमांच दे गया. देर रात तक लोगों की सांसें थमी रही. दोनों गठबंधनों की जीत हार एक-एक सीट के नतीजों पर बदल रहा था. इस दौरान कई नये चेहरों ने जीत दर्ज की, वहीं कई चर्चित चेहरों की हार हुई. इसमें कई तो नीतीश सरकार में मंत्री रह चुके हैं. आइये एक नजर डालते हैं उन नये चहरों पर और उन नामचीन चेहरों पर जिनकी जीत और हार महत्वपूर्ण रही.

श्रेयसी सिंह

नेशनल शूटर श्रेयसी सिंह को इस बार बिहार की जमुई सीट से पहली बार जीत मिली है. उनके पिता दिग्विजय सिंह केंद्र में मंत्री रहे थे, जबकि मां पुतुल देवी सांसद हैं. इंटरनेशनल शूटर रहीं श्रेयसी को पहली बार भाजपा ने चुनावी मैदान में उतारा था और जमुई से टिकट दिया था. जहां से वो राजद के विजय प्रकाश को हराने में सफल रही हैं.

चेतन आनंद

श्रेयसी सिंह की तरह ही चेतन आनंद भी पहली बार विधायक बने हैं. चेतन के पिता आनंद मोहन और मां लवली आनंद दोनों बिहार के राजनीति से जुड़े हैं और सांसद रह चुके हैं. इस बार के चुनाव में लवली आनंद और चेतन दोनों मैदान में थे. दोनों को राजद ने टिकट दिया था. लवली आनंद भले ही सहरसा से हार गयी हों, लेकिन चेतन ने राजद उम्मीदवार के तौर पर शिवहर से जीत हासिल की है.

ऋषि कुमार

बिहार में एक और युवा इस बार विधायक बना है, जिनका नाम ऋषि सिंह है. ऋषि के परिवार का भी राजनीति से पुराना नाता है. उनकी मां कांति सिंह केंद्रीय मंत्री थीं और लालू परिवार की काफी करीबी मानी जाती हैं. कांति के बेटे ऋषि इस बार ओबरा क्षेत्र से चुनाव लड़े और उन्होंने जीत भी दर्ज की.

पुष्पम प्रिया चौधरी

खुद को सीएम कैंडिडेट घोषित सुर्खियों में आईं प्लूरल्स पार्टी की पुष्पम प्रिया चौधरी को दो सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. पुष्पम दो सीट बांकीपुर और बिस्फी से चुनाव लड़ी थीं. बिस्फी में पुष्पम प्रिया को नोटा से भी कम यानी महज 1509 वोट मिले. वहीं, बांकीपुर सीट पर पुष्पम को 5189 वोट मिले. दोनों सीट पर वो जमानत तक नहीं बचा पाईं.

लव सिन्हा

कांग्रेस नेता और बॉलीवुड एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को बांकीपुर सीट पर चुनाव लड़े और 39 हजार 36 वोटों से हार गए. बांकीपुर सीट से बीजेपी के नितिन नवीन चुनाव जीत गए. इस चुनाव में नितिन नवीन को 83068 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार लव सिन्हा को 44032 वोट मिले. बांकीपुर, बिहार की हाईप्रोफाइल सीटों में से एक थी.

पप्पू यादव

जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष और प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (PDA) की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा राजेश रंजन यादव उर्फ पप्पू यादव को भी हार का सामना करना पड़ा. मधेपुरा सीट से चुनाव लड़े पप्पू यादव को 26,462 वोट मिले. वो तीसरे नंबर पर रहे, जबकि इस सीट पर आरजेडी के चंद्रशेखर ने जीत दर्ज किया.

सुभाषिनी बुंदेला

शरद यादव की बेटी सुभाषिनी बुंदेला भी चुनाव हार गई हैं. ऐन चुनाव से पहले सुभाषिनी ने कांग्रेस ज्वॉइन किया था. इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें बिहारीगंज सीट से टिकट दिया था. हालांकि, वह जेडीयू प्रत्याशी निरंजन कुमार मेहता से हार गईं. निरंजन कुमार मेहता को कुल 81,531 वोट पड़ा, वहीं सुभाषिनी बुंदेला को 62,820 लोगों ने वोट किया.

जयकुमार सिंह

रोहतास जिले की दिनारा सीट से राज्य के सहकारिता मंत्री जय कुमार सिंह चुनाव हार गये हैं. उन्हें राजद के विजय कुमार मंडल ने हराया. मंडल को कुल 59,541 वोट मिले जबकि दूसरे नंबर पर लोजपा उम्मीदवार और बीजेपी के बागी राजेंद्र सिंह रहे. उन्हें 51,313 वोट मिले. मंत्री जयकुमार सिंह 27,252 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे. साल 2015 में जयकुमार सिंह राजद-जेडीयू महागठबंधन में मात्र 2691 वोटों के अंतर से जीते थे.

सुरेश कुमार शर्मा

मुजफ्फरपुर विधान सभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार और नीतीश सरकार में नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा भी चुनाव हार गये हैं. महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस के विजेंद्र चौधरी ने उन्हें छह हजार वोटों के अंतर से हराया. कांग्रेस उम्मीदवार को 81 हजार वोट मिले, जबकि मंत्री शर्मा को करीब 75 हजार वोट मिले. 2015 में सुरेश शर्मा ने विजेंद्र चौधरी को हराया था, तब चौधरी जेडीयू के उम्मीदवार थे. सुरेश शर्मा इस सीट से चार बार विधायक चुने जा चुके हैं.

कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा

जहानाबाद सीट से नीतीश सरकार के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा भी चुनाव हार गए हैं. उन्हें राजद के सुदय यादव ने हराया है. जहानाबाद से टिकट मिलने पर वर्मा का लोग विरोध कर रहे थे. उनसे शिक्षक वर्ग नाराज था. 2015 में वर्मा ने घोसी सीट से चुनाव जीता था लेकिन इस बार उनकी सीट बदल दी गयी थी. सुदय यादव के पिता मुंद्रिका यादव 2015 में यहां से राजद के टिकट पर जीते थे. उनके निधन के बाद उप चुनाव में सुदय ने जीत दर्ज की थी.

संतोष कुमार निराला

नीतीश सरकार में परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला बक्सर जिले की राजपुर सुरक्षित सीट से चुनाव हार गए हैं. उन्हें कांग्रेस के विश्वनाथ राम ने करीब 20 हजार वोटों के अंतर से हराया. 1991 में बहुजन समाज पार्टी से करियर शुरू करने वाले संतोष निराला ने बाद में जेडीयू का दामन थाम लिया था.

रामसेवक सिंह

एनडीए सरकार में कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह हथुआ सीट से जेडीयू प्रत्याशी थे. उन्हें भी चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है. राजद के राजेश कुमार सिंह ने उन्हें 30 हजार मतों के अंतर से हराया, राजद को यहां से 86, 731 वोट मिले, जबकि रामसंवक सिंह को 56,204 वोट मिले. सिंह पहले लगातार दो बार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं.

Posted by Ashish Jha

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