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जब लोहिया की किताब से प्रेरित होकर विधायक ने कर्पूरी ठाकुर के लिए छोड़ी अपनी सीट, कांग्रेस के दिग्गज की हुई जमानत जब्त

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
स्व. कर्पूरी ठाकुर
स्व. कर्पूरी ठाकुर
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मधुबनी: जेपी आंदोलन के बाद देश में हुए 1977 के आम चुनाव के साथ ही बिहार विधानसभा का चुनाव हुआ. लोकसभा के चुनाव में कर्पूरी ठाकुर समस्तीपुर से सांसद निर्वाचित हुए. मधुबनी जिले के फुलपरास विधानसभा सीट पर युवा देवेंद्र प्रसाद यादव चुनाव जीते. चुनाव बाद कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में बिहार में जनता पार्टी की सरकार बनी. मुख्यमंत्री बने कर्पूरी ठाकुर को छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य था.

देवेंद्र प्रसाद यादव ने छोड़ी अपनी सीट

तुरंत हुए चुनाव में सभी सीटें भरी हुई थीं. विधान परिषद की सीटें भी खाली नहीं थीं. देवेंद्र प्रसाद यादव पहली बार छात्र आंदोलन से निकल विधायक बने थे. उन्होंने अपनी जीती सीट कर्पूरी ठाकुर के लिए छोड़ने का फैसला किया. उन्होंने तत्काल विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. इसके तीन महीने के भीतर उपचुनाव हुए. उपचुनाव में कर्पूरी ठाकुर फुलपरास विधानसभा सीट से जनता पार्टी के उम्मीदवार बने.

कांग्रेस के दिग्गज नेता की जमानत जब्त 

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के खिलाफ उस समय के दिग्गज यादव नेता राम जयपाल सिंह यादव को मैदान में उतारा. कांग्रेस की समझ थी कि यादव बहुल फुलपरास की जनता अतिपिछड़ी जाति के कर्पूरी ठाकुर को स्वीकार नहीं कर पायेगी, लेकिन जब चुनाव परिणाम आया, तो कर्पूरी ठाकुर 67 हजार से अधिक मतों से चुनाव जीत गये. राम जयपाल सिंह यादव की जमानत जब्त हो गयी. इसके पहले देेंवेंद्र प्रसाद यादव 40 हजार मतों से विजयी हुए थे.

डाॅ राममनोहर लोहिया की किताब जाति से जमात तक पढ़ कर प्रेरित हुए

विधायक पद से इस्तीफा देने वाले देवेंद्र प्रसाद यादव एक साल तक बेरोजगार रहे. साल भर बाद 1978 में उन्हें बिहार विधान परिषद का सदस्य नियुक्त किया गया. बाद में वे केंद्र सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री भी बने. देवेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि डाॅ राममनोहर लोहिया की किताब जाति से जमात तक पढ़ कर वह प्रेरित हुए थे और कर्पूरी ठाकुर जी के लिए अपनी तुरंत की जीती हुई सीट छोड़ दी थी.

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