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बिहार विधानसभा चुनाव 2020: नक्सल का गढ़ रहे पालीगंज सीट पर माले व एनडीए में किसका पलड़ा रहेगा भारी, जानें क्या है सियासी समीकरण

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
सांकेतिक फोटो
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पटना: कभी नक्सल का गढ़ कहे जाने वाले पालीगंज विधानसभा सीट का चुनाव दिलचस्प मोड़ पर है. चुनाव मैदान में उतरने से पहले उम्मीदवारों को टिकट के लिए ही कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है. वर्तमान राजद विधायक जयवर्द्धन यादव उर्फ बच्चा यादव के जदयू में शामिल होने से टिकट की जंग तेज हो गयी है. महागठबंधन कोटे से इस बार यह सीट माले को दी गयी है. उनकी तरफ से जेएनयू छात्र संघ के पूर्व महासचिव संदीप सौरभ को उम्मीदवार बनाया है.

एनडीए से टिकट लेने की होड़ 

एनडीए से जदयू और भाजपा दोनों पार्टियों के उम्मीदवार टिकट के लिए जोर लगा रहे हैं. भाजपा से पूर्व विधायक उषा विद्यार्थी से लेकर रामजनम शर्मा और रवींद्र रंजन, जबकि जदयू से बच्चा यादव टिकट की दौड़ में हैं.

पालीगंज विधानसभा क्षेत्र का समीकरण

पालीगंज विधानसभा क्षेत्र में अब तक जातीय आधार पर जीत-हार के समीकरण बनते-बिगड़ते रहे हैं. 1952 से लेकर 2015 तक हुए 18 विधानसभा चुनावों व उप चुनाव में सात-सात बार यादव और कुशवाहा, जबकि चार बार भूमिहार जाति के उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया है. इस सीट से सर्वाधिक पांच बार शेर-ए-बिहार के नाम से मशहूर स्व रामलखन सिंह यादव चुनाव जीते.

पिछले पांच चुनावों में दो-दो बार माले-राजद का रहा कब्जा

वर्ष 2000 से 2015 तक हुए पांच विधानसभा चुनावों में इस सीट पर दो बार माले , जबकि दो बार राजद का कब्जा रहा. 1996 व 2010 में भाजपा ने अपना परचम लहराया. वर्ष 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऊषा विद्यार्थी ने राजद के जयवर्द्धन यादव को करीब 10 हजार वोटों के अंतर से हराया था. तीसरे स्थान पर माले उम्मीदवार एनके नंदा रहे थे. वहीं, 2015 के विधानसभा चुनाव में यहां से राजद के जयवर्द्धन यादव ने भाजपा प्रत्याशी रामजनम शर्मा को 24,453 मतों से परास्त किया था. इसमें भाकपा- माले के अनवर हुसैन को 19338 मत मिले थे.

मुद्दे जो रह गये अनुसुलझे

बनते -बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों के बीच जनता के मुद्दे अनुसलझे ही रह गये. क्षेत्र को नगर पंचायत का दर्जा, रेलवे लाइन व बाइपास देने की मांग, ट्रेजरी व डिग्री कॉलेज की स्थापना सहित कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनकी मांग वर्षों से होती रही है. सरकारी नलकूप ठप हैं, जबकि नहरों में समय से पानी नहीं मिलता है. अतिक्रमण रहने के कारण बाजार में हमेशा जाम की स्थिति रहती है. पुनपुन नदी पर समदा में पुल के निर्माण की बहुप्रतीक्षित मांग अब भी बरकरार है. सिगोड़ी बुनकर हस्तकरघा को उद्योग का रूप नहीं दिया जा सका है.

एक नजर में पालीगंज विधानसभा क्षेत्र

पुरुष 144780

महिला 134993

ट्रांसजेंडर 6

कुल मतदाता 279779

लिंगानुपात 932.40

कब कौन-कौन जीता

वर्ष विधायक पार्टी

1952- रामलखन सिंह यादव- कांग्रेस

1957- चंद्रदेव प्रसाद वर्मा- सोशलस्टि पार्टी

1962- रामलखन सिंह यादव- कांग्रेस

1967- चंद्रदेव प्रसाद वर्मा- सोशलस्टि पार्टी

1969 -चंद्रदेव प्रसाद वर्मा- सोशलस्टि पार्टी

1972- कन्हाई सिंह- कांग्रेस

1977 -कन्हाई सिंह -निर्दलीय

1980- रामलखन सिंह यादव- कांग्रेस

1985 -रामलखन सिंह यादव -कांग्रेस

1990 -रामलखन सिंह यादव- कांग्रेस

1991 -चंद्रदेव प्रसाद वर्मा- जनता दल

1995 -चंद्रदेव प्रसाद वर्मा -जनता दल

1996- जनार्दन शर्मा -भाजपा

2000 -दीनानाथ सिंह यादव -राजद

2005(फरवरी) -नंद कुमार नंदा भाकपा- माले

2005(अक्तूबर)- नंद कुमार नंदा भाकपा- माले

2010 -डॉ उषा विद्यार्थी- भाजपा

2015 -जयवर्द्धन यादव -राजद

Posted by : Thakur Shaktilochan Shandilya

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