Bihar Board: 1 फरवरी से इंटरमीडिएट और 17 फरवरी से मैट्रिक की परीक्षा शुरू होगी. बिहार बोर्ड की तरफ से इस बार परीक्षा के दौरान निगरानी के लिए खास तैयारी की गई है. किसी भी तरह की लापरवाही या फिर फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. एग्जाम सेंटर पर पुलिस और पदाधिकारी तैनात रहेंगे. चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे, जिसकी कंट्रोल रूम से निगरानी की जाएगी.
मॉडर्न और डिजिटल तरीके से मॉनिटरिंग
जानकारी के मुताबिक, पूरी तरह डिजिटल और मॉडर्न तरीके से मॉनिटरिंग की जाएगी. एग्जाम के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने से लेकर रिजल्ट जारी होने तक हर एक प्रोसेस को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है. ऐसा इस वजह से किया गया है ताकि ताकि गड़बड़ी की संभावना बेहद कम हो. स्टूडेंट्स को एग्जाम हॉल में कैमरा, फोन, ब्लूटूथ, स्मार्ट वॉच या फिर किसी भी तरह के इलेक्टॉनिक गैजेट्स ले जाने पर मनाही रहेगी.
एआई का होगा इस तरह इस्तेमाल
खास बात इस बार की यह भी रहेगी कि एआई का इस्तेमाल किया जाएगा. परीक्षा देने के लिए अगर कोई स्टूडेंट फर्जी डॉक्यूमेंट्स लेकर पहुंचता है तो एआई उसे पकड़ेगा. कई बार ऐसे मामले आते हैं कि कोई स्टूडेंट फर्जी सर्टिफिकेट लेकर एग्जाम देने पहुंचते हैं, या फिर किसी और स्टूडेंट के बदले एग्जाम देने आते हैं, कई बार ऐसा भी होता है कि नाम बदलकर एक से ज्यादा बार परीक्षा देते हैं, ऐसे स्टूडेंट्स को एआई आसानी से पकड़ लेगा.
आनंद किशोर ने क्या कहा था?
बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया था कि एआई के जरिए 1985-86 तक के पुराने सर्टिफिकेट की जांच की जा सकती है. नाम, डेट ऑफ बर्थ, साइन, अड्रेस और आधार डेटा का मिलान किया जाता है, इसके बाद फर्जी डॉक्यूमेंट्स वाले की पहचान होती है. एआई से होने वाले फायदे को लेकर उन्होंने कहा था कि इससे सब कुछ पारदर्शी रहेगा. काम तेजी से होगा. साथ ही गड़बड़ी भी तुरंत पकड़ी जा सकेगी.
