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बिहार विधानसभा चुनाव 2020: इस बार चुनाव में नहीं गूंजेगी लालू ,शरद और पासवान की आवाजें, इनके कंधे रहेगा भीड़ खींचने का दारोमदार...

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
लालू यादव, जीतन राम मांझी व शरद यादव
लालू यादव, जीतन राम मांझी व शरद यादव
फाइल फोटो

बिहार विधानसभा चुनाव 2020, राजदेव पांडेय,पटना: भाषण शैली के जरिये मतदाताओं का रुख मोड़ देने वाले वक्ताओं का इस बार के चुनाव में कमी दिखेगी. एक तो कोरोना महामारी की मार, दूसरी ओर बिहार के आधा दर्जन बड़े नेताओं के आवाज चुनावी समर में नहीं सुनने को मिलेंगे. जदयू में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुनाव प्रचार में मौजूदगी रहेगी. वे लोगों के बीच भी जायेंगे और वर्चुअल तरीके से भी अपनी बात मतदाताओं के सामने रखेंगे. दूसरी ओर, राजद प्रमुख लालू प्रसाद को यदि जमानत मिल भी गयी तो कोर्ट की अनुमति के बाद ही वे चुनाव प्रचार कर पायेंगे. बीमार होने के कारण लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव चुनावी समर से दूर रहेंगे. पूर्व सीएम राबड़ी देवी और जदयू के प्रदेश अध्यक्ष सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह के अस्वस्थ होने की सूचना है. ठीक चुनाव के पहले राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह इस दुनिया में नहीं रहे. सभी प्रमुख दलाें में बड़े नेता चुनाव प्रचार से दूर रहेंगे.

चुनावी सभाओं की क्या है भूमिका ?

कोविड के दौर में सोशल डिस्टैंसिंग की वजह से चुनावी सभाओं से बड़ी पार्टियां परहेज करने जा रही है. यह भी एक सच्चाई है कि सत्ताधारी दलों को छोड़कर राजद समेत सभी छोटी और क्षेत्रीय पार्टियां चुनावी सभाओं पर ही खास जोर देंगी. यह देखते हुए कि राष्ट्रीय दलों और सत्ताधारी दलों की तरह इनके पास समुचित स्रोत नहीं हैं.

राजद को तीन अद्भुत वक्ताओं की कमी खलेगी

मात्र पांच साल के अंतराल से हो रहे इस चुनाव में पिछले चुनाव की तुलना में इस बार राजद के पास तीन अद्भुत वक्ताओं की कमी खलेगी. इन वक्ताओं में सबसे खास हैं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और दिवंगत रघुवंश प्रसाद सिंह. राजद सुप्रीमो इस समय जेल में हैं. रघुवंश प्रसाद सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं. इन दोनों वक्ताओं की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता कि लालू प्रसाद ने पिछले विधानसभा चुनाव में 172 और दिवंगत रघुवंश प्रसाद सिंह ने 100 से अधिक सभाएं और रोड शो किये थे. राबड़ी देवी की सभाओं की संख्या भी सौ से कम रही रही थी. स्थानीय बोली से ग्रामीण महिलाओं के बीच आवाज बुलंद करने वाली राबड़ी देवी अस्वस्थ हैं. इन तीनों नेताओं का परिदृश्य से बाहर रहने से भीड़ खींचने वाली सभाएं बहुत कम दिखाई देंगी. इसका पूरा दबाव अकेले तेजस्वी यादव के कंधों पर होगा. महागठबंधन के तहत वाम मोर्चे में उनके कैडर के वरिष्ठ नेताओं से परे अगर कन्हैया कुमार की भाषण शैली मतदाताओं को अपनी ओर खींच सकती है.

नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी पर मतदाता खींचने का दबाव रहेगा

जदयू में सिर्फ नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी पर मतदाता खींचने का दबाव रहेगा. 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने 39 दिनों में 243 विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी सभाएं की थीं. इस बार उनके अलावा आरसीपी सिंह, ललन सिंह,अशोक चौधरी, संजय झा आदि नेताओं पर भी प्रचार की जिम्मेदारी होगी. जदयू के वरिष्ठ नेताब शिष्ठ नारायण सिंह और प्रशांत किशोर की कमी खलेगी . श्री सिंह अस्वस्थ हैं और प्रशांत किशोर दल से बाहर हैं.

पीएम मोदी वर्चुअल मीटिंग तक ही सीमित रहेंगे

भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल मीटिंग तक ही सीमित रहेंगे. तब भाजपा के सांसद रहे शत्रुघ्न सिन्हा की भी सबसे बड़ी कमी अखरेगी.शहरी मतदाताओं में उनका असर उनकी शानदार भाषण शैली की वजह से ही था. इस बार पीएम की भी वर्चुअल रैली की संभावना है. केंद्र सरकार ने अनलॉकडान 5 में राजनीतिक सभाएं करने की छूट दी, तो गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी चुनाव प्रचार में मुख्य वक्ता होंगे.

2015 के चुनाव में किस स्थानीय नेता ने कितनी रैलियां की

लालू प्रसाद - 248 सभाएं

नीतीश कुमार- 130,39 दिनों में 243 विस क्षेत्रों में सभाएं

राम विलास पासवान-- 72 सभाएं

रघुवंश प्रसाद सिंह - सबसे अधिक रोड शो- 100

राबड़ी देवी- 70 सभाएं

शरद यादव- 40 सभाएं

Posted By: Thakur Shaktilochan Shandilya

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