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बिहार सशस्त्र पुलिस बिल कानून पास, नीतीश कुमार बोले- लोगों को कष्ट नहीं, रक्षा करने वाला है कानून

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
फाइल

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा में मंगलवार को पौने छह घंटे के जद्दोजहद के बाद पास हुए बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक-2021 के प्रावधानों की जानकारी दी. उन्होंने सदन को बताया कि विपक्ष को इस कानून को पूरी तौर से पढ़ लेना चाहिए. इसके बाद उनको यह एहसास होगा कि यह विधेयक कष्ट देनेवाला नहीं, बल्कि लोगों की रक्षा करनेवाला कानून है.

उन्होंने कहा कि आश्चर्य है कि इसको लेकर लोगों के बीच गलतफहमी पैदा की गयी. मुख्यमंत्री ने कहा, यह कोई नया विधेयक नहीं है. बीएमपी के नाम में परिवर्तन कर इसका नामाकरण बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक-2021 किया गया है.

इसका उपयोग बोधगया के महाबोधि मंदिर से लेकर दरभंगा एयरपोर्ट की सुरक्षा में लगाया जायेगा. जिन स्थलों पर बिहार सशस्त्र पुलिस को तैनात किया जायेगा, वहां पर किसी तरह की आपराधिक घटना होने पर अपराधी को पकड़ने का अधिकार उसके पास होगा. उस मौके पर तो पुलिस को घटनास्थल पर अपराधी को पकड़ने के लिए किसी की इजाजत मांगने की जरूरत तो नहीं होगी. जब इस विधेयक पर तीन घंटे तक हुई चर्चा के दौरान उसकी एक-एक बात पर विचार किया गया था.

सदन में विपक्ष द्वारा मंगलवार को की गयी घटना को लेकर उन्होंने सदन को बताया कि इसके पहले हमने डीजीपी और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव से यह जिक्र किया था कि कहीं उनके बीच का ही कोई आदमी तो गुमराह नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा कि सदन के अंदर इस विधेयक पर सदस्य एक-एक प्रश्न जानना चाहते थे.

उन्होंने कहा कि यह काम अधिकारियों का था कि वह पहले ही इसकी जानकारी प्रेस के माध्यम से लोगों तक पहुंचा देते तो गुमराह होने की नौबत नहीं आती. कैबिनेट से पास होने के बाद जब यह विधेयक लाया गया तो इसको पास कराना ही था.

उन्होंने विपक्षी सदस्यों द्वारा मंगलवार को विधानसभा के अंदर और विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष के सामने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह का दृश्य हमने अब तक नहीं देखा था. उन्होंने आसन से अपील की कि वह नवनिर्वाचित सदस्यों को विधानसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली का प्रशिक्षण करा दें. विपक्ष विधानसभा में सरकार की बात सुन लेता तो यह नौबत नहीं आती.

उन्होंने कहा कि विधेयक के माध्यम से सशस्त्र पुलिस बलों को अनिश्चित अधिकार नहीं दिया गया है. अगर वह ठीक से काम नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है. बिहार में लाया गया यह विधेयक कोई नया विधेयक नहीं है. पश्चिम बंगाल और ओड़िशा जैसे राज्यों में इस प्रकार का कानून पहले से है.

सदन के बाहर अपने कक्ष में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक में पुलिस द्वारा गड़बड़ी किये जाने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है. विपक्ष गलत बात कह रहा है. कई ऐसे प्रावधान हैं, जिसमें गड़बड़ी करने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.

विधानसभा में बिहार सशस्त्र पुलिस विधेयक-2021 पेश करने के बाद सरकार का पक्ष रखते हुए ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि इस विधेयक को लाने की आवश्यकता है. बिहार की सीमा तीन राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल से सटी है. इसकी रक्षा के लिए राज्य को पहले केंद्रीय पुलिस बलों की 20 टुकड़ियों की आ‌वश्यकता थी, जो 2020 में बढ़कर 45 टुकड़ियों की हो गयी है.

अपना सशस्त्र पुलिस बल होने से राज्य के खजाने पर कम बोझ होगा और राज्य के नौजवानों को रोजगार भी मिलेगा. उन्होंने बताया कि बिहार में पहले से ही दो प्रकार के बल काम कर रहे हैं. बिहार सैन्य पुलिस का ही पुनर्गठन किया गया है. यह नया नहीं है.

उन्होंने बताया कि महाबोधि मंदिर, दरभंगा एयरपोर्ट के अलावा राज्य में सार्वजनिक व वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के अलावा राज्य में नयी इथनॉल नीति से नये उद्योगों को भी सुरक्षा की आवश्यकता होगी. रही बात अपराधियों की गिरफ्तारी की तो यह पहले से ही पुलिस को दिया गया है. इसके तहत संदिग्ध व्यक्ति को बिना वारंट के ही पुलिस गिरफ्तार कर सकती है.

Posted by Ashish Jha

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