अगर न होतीं ये दस चूक, तो न होता इतना बड़ा हादसा

पटना : दशहरा के अवसर पर गांधी मैदान में रावण दहन से पहले 10 बड़ी लापरवाही खुल कर सामने आयी है. प्रभात खबर ने पड़ताल की, तो ये तथ्य सामने आये. गृह सचिव आमिर सुबहानी और अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) गुप्तेश्वर पांडेय के नेतृत्व में हादसे की जांच शुरू हो गयी है. प्रभात खबर ने […]

पटना : दशहरा के अवसर पर गांधी मैदान में रावण दहन से पहले 10 बड़ी लापरवाही खुल कर सामने आयी है. प्रभात खबर ने पड़ताल की, तो ये तथ्य सामने आये. गृह सचिव आमिर सुबहानी और अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) गुप्तेश्वर पांडेय के नेतृत्व में हादसे की जांच शुरू हो गयी है.
प्रभात खबर ने पड़ताल के क्रम में 10 ऐसी चूकों को चिह्न्ति किया, जो हादसे के लिए जिम्मेवार हैं. इनकी पहचान प्रत्यक्षदर्शियों से की गयी बातचीत पर आधारित है.
मैदान में पसरा अंधेरा
गांधी मैदान के सौंदर्यीकरण के तहत मैदान के चारों ओर आठ हाइमास्ट लाइटें लगी हैं. लेकिन घटना के समय गांधी मैदान में दो लाख से भी अधिक की भीड़ के बावजूद गांधी मैदान में महज पांच हाइमास्ट लाइटें ही जल रही थीं, जो इतनी बड़ी भीड़ के लिए पर्याप्त नहीं थी. मैदान में अंधेरे से वहां लगे सीसीटीवी की तसवीरें भी धुंधली हैं, जिसके कारण जिम्मेवार लोगों की पहचान में परेशानी आ रही है.
जिम्मेवार : पटना नगर निगम
एक गेट पर दबाव
गांधी मैदान को सात फुट ऊंची चहारदीवारी से घेरे जाने के बाद कार्यक्रम की समाप्ति के बाद इतनी बड़ी भीड़ के निकलने के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गयी थी. हालांकि गांधी मैदान के चारों तरफ कुल सात बड़े गेटों का निर्माण कराया गया है, लेकिन इनमें केवल दो ही गेटों को खोला गया था, जिसके कारण दक्षिणी गेट से बाहर निकलनेवाली भीड़ का दबाव अत्यधिक था.
जिम्मेवार : जिला प्रशासन
काउ कैचर खराब
मैदान में आवारा पशुओं के प्रवेश पर रोक के लिए गेट पर बने काउ कैचर के लोहे के रड खराब होकर जमीन में धंस गये हैं, जिसके कारण बिना देखे बाहर निकलनेवाला कोई भी शख्स दुर्घटना का शिकार हो सकता है. रामगुलाम चौक की तरफवाले गेट के काउ कैचर पर जिला प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया. भगदड़ की स्थिति बनने पर कई महिलाओं व बच्चों की मौत इसी काउ कैचर में गिर कर हुई.
जिम्मेवार : भवन निर्माण विभाग
सात फुट की चहारदीवारी
गांधी मैदान के सौंदर्यीकरण और सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने उसकी सात फुट ऊंची दीवार से घेराबंदी कर दी है, जिसके कारण किसी भी आपात स्थिति में गेट के अलावा बाहर निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है. दीवार के अत्यधिक ऊंचा होने के कारण महिलाओं व बच्चों का पार करना भी संभव नहीं है. भगदड़ की स्थिति में सुरक्षा के लिए यह दीवार भी घातक साबित हुई.
जिम्मेवार : जिला प्रशासन
क्राउड मैनेजमेंट का अभाव
गांधी मैदान में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों को भीड़ नियंत्रण के लिए किसी भी तरह का प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं कराया गया. ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में पुलिस के अप्रशिक्षित जवान सीधे लाठियों की भाषा का प्रयोग करते हैं, जिससे भीड़ के अक्सर अनियंत्रित होने का खतरा बना रहता है. अगर इन्हें प्रशिक्षण मिला होता तो ऐसी नौबत नहीं आती.
जिम्मेवार : जिला प्रशासन
अधिकारियों की गैरमौजूदगी
जब गांधी मैदान के दक्षिणी छार स्थित गेट से बाहर निकलने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी थी, तब वहां तैनात स्टैटिक मजिस्ट्रेट और अन्य जिम्मेवार अधिकारी मौजूद नहीं थे. यहां तक कि पुलिस के जवान भी भगदड़ के समय मौके पर मौजूद नहीं थे, जिसके कारण भीड़ को नियंत्रित करने का कोई उपाय नहीं किया गया. इससे हालात और भी बिगड़ते चले गये.
जिम्मेवार : डीएम और एसएसपी
नहीं थी कोई आपात सेवा
गांधी मैदान में रावण वध जैसे धार्मिक कार्यक्रम में उमड़ने वाली भीड़ को लेकर सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं किये
गये थे. यहां तक कि इतनी बड़ी भीड़ के लिए न तो कोई माइक थी और न ही मौके पर एक भी एंबुलेंस को तैनात किया गया था. घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने में भी घंटों का समय लग गया, जिसमें कई लोगों की जान चली गयी.
जिम्मेवार : जिला प्रशासन/ आयोजक
वीआइपी सुरक्षा पर पूरा ध्यान
हालांकि गांधी मैदान में घटना के समय बड़ी संख्या में पुलिस बल और स्टैटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गयी थी. लेकिन, कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री के काफिले को सुरक्षित निकालने के क्रम में फ्रेजर रोड को करीब 15 मिनट के लिए बंद कर दिया गया था. इससे एक्जिबिशन रोड के रामगुलाम चौक से लेकर होटल मौर्य तक वाहनों और पैदल चलने वालों से रास्ता जाम हो चुका था.
जिम्मेवार : पटना पुलिस ट्रैफिक
भीड़ में असामाजिक तत्व
हादसे की एक बड़ी वजह असामाजिक तत्व भी बने. ये असामाजिक तत्व भी गांधी मैदान में बड़ी संख्या में सक्रिय थे. जब घर लौटती भीड़ दक्षिणी गेट से निकलने के लिए जद्दोजहद कर रही थी, तब इन्हीं असामाजिक तत्वों ने बिजली का तार गिरने और करेंट आने की अफवाह उड़ा दी, जिसके कारण मची भगदड़ में 33 लोगों की जान चली गयी.
जिम्मेदार : जिला प्रशासन/ आयोजक
अव्यवस्थित ट्रैफिक
रावण वध कार्यक्रम के समय गांधी मैदान के चारों तरफ मूर्ति विसर्जन के लिए जुलूस भी सड़कों पर था. ऐसे में गांधी मैदान के चारों तरफ भीषण जाम की स्थिति बनी हुई थी. यहां सामान्य यातायात की भी व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं काम कर रही थी. जब रावण वध कार्यक्रम खत्म हुआ और लोग घरों के ओर लौटने लगे तो स्थिति और भी खराब हो गयी.
जिम्मेदार : ट्रैफिक महकमा

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