पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पर्यावरण संकट और प्रदूषण नियंत्रण के बारे में कहा कि इसके लिए कानून और नियम जरूरी हैं, लेकिन लोगों तक जब तक इसकी जानकारी और जागरूकता नहीं होगी, तब तक इसका लाभ नहीं मिलेगा.
गुरुवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण परिषद के 64वें दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण पर जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार के तीन शहरों-पटना, गया और मुजफ्फरपुर में हालात और भी खराब हैं. इसे लेकर सरकार ने 15 साल पुराने डीजल वाहनों पर पटना सहित आसपास के शहरों में रोक लगा दी. उनकी जगह इ-वाहन को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इ-वाहनों का उपयोग मेरे अलावा उपमुख्यमंत्री सहित कई मंत्री और अधिकारी भी कर रहे हैं. उन्होंने प्लास्टिक के उपयोग का समाधान ढूंढ़ने पर बल दिया. साथ ही कहा कि अब राज्य के सरकारी भवनों के निर्माण में फ्लाइ एस ब्रिक्स का प्रयोग कियाजा रहा है.
लड़कियों को शिक्षित करने से प्रजनन दर में कमी मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 में राज्य की प्रजनन दर 4.3 थी, जो घटकर अब 3.2 हो गयी है. आकलन से पता चला कि पति और पत्नी में अगर पत्नी मैट्रिक पास है, तो देश और बिहार दोनों की प्रजनन दर दो है. पति और पत्नी में अगर पत्नी इंटर पास है तो देश की प्रजनन दर 1.7 और बिहार की प्रजनन दर 1.6 है. हमलोगों का मानना है कि अगर लड़कियों को कम-से-कम इंटर तक शिक्षित करा देंगे तो जनसंख्या नियंत्रण में सुविधा होगी.
बारिश में कमी
सीएम ने कहा कि राज्य में औसत बारिश पिछले 30 वर्षों में घटकर 1027 मिमी हो गयी है. पिछले 13 वर्षों में यह घटकर 901 मिमी रह गयी है. 2018 में राज्य के 534 प्रखंडों में से 280 प्रखंड सूखाग्रस्त घोषित किये गये थे. पिछले वर्ष जुलाई में फ्लैश फ्लड और सितंबर में अतिवृष्टि से बाढ़ की स्थिति बनी और कई शहरों में जलजमाव की स्थिति भी बनी.
कचरा प्रबंधन को लेकर काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केंद्र की संख्या बढ़ायी गयी है. नालंदा जिले के राजगीर प्रखंड की भूई ग्राम पंचायत में जीविका समूह द्वारा गीला और ठोस कचरे को अलग–अलग करके बेहतर ढंग से इसका प्रबंधन किया गया है.
इसे अन्य जगह भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. गंगा नदी में नाले के पानी को जाने से रोकने के लिए भी कदम उठाये जा रहे हैं. नाले के पानी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से साफ कर कृषि कार्य के लिए उपयोग किया जायेगा.
प्रतिनिधियों को राजगीर व बोधगया घूमने की सलाह
नीतीश कुमार ने सम्मेलन में आये प्रतिनिधियों को राजगीर की आयुध फैक्टरी के पास बने तीन–चार बड़े तालाब, बिहार म्यूजियम, बोधगया में 65 एकड़ की बुद्ध वाटिका, बायो डायवर्सिटी पार्क, घोड़ाकटोरा देखने की सलाह दी. साथ ही बताया कि राजगीर में जू-सफारी और इसकी बगल में नेचर सफारी बन रहा है. बिहार में विकास का काम देखने के लिए तीन-चार साल बाद अगला सम्मेलन फिर आयोजित करने के लिए कहा और 19 जनवरी को मानव शृंखला में शामिल होने की अपील की.
ये रहे मौजूद
सम्मेलन को उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सीके मिश्रा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष एसपी सिंह परिहार, राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह, बीएसपीसीबी के अध्यक्ष अशोक कुमार घोष ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, योजना एवं विकास विभाग के सचिव मनीष कुमार वर्मा, बीएसपीसीबी के सदस्य सचिव आलोक कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह सहित विभिन्न राज्यों से आये अध्यक्ष, सदस्य सचिव सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे.
बिहार म्यूजियम के मेन गेट पर मुख्य शिलापट्ट बदलने का निर्देश : सम्मेलन के बाद निकलते समय मुख्यमंत्री ने बिहार म्यूजियम के प्रोजेक्ट इंजीनियर से बातचीत की. साथ ही म्यूजियम के मेन गेट पर लगे मुख्य शिलापट्ट को बदल कर नये ढंग से लगाने का निर्देश प्रोजेक्ट इंजीनियर को दिया.
