पटना : राज्य के शहरी निकायों में गरीबों को घर मुहैया कराने की रफ्तार काफी धीमी है. बीते छह वर्ष से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत राज्य में एक भी सामूहिक आवास निर्माण नहीं किया जा सका है. कई राज्यों में इनका आंकड़ा हजारों में है. मगर, सूबे के शहरी निकायों में मल्टी स्टोरी भवन बनाकर करीब एक लाख शहरी गरीबों को घर देने की योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पायी है. खास बात यह है कि नगर विकास व आवास विभाग की ओर से चलायी जा रही योजना के लिए जिलों के पास जमीन ही नहीं है.
गरीबों को घर देने में जमीन की समस्या
पटना : राज्य के शहरी निकायों में गरीबों को घर मुहैया कराने की रफ्तार काफी धीमी है. बीते छह वर्ष से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत राज्य में एक भी सामूहिक आवास निर्माण नहीं किया जा सका है. कई राज्यों में इनका आंकड़ा हजारों में है. मगर, सूबे के शहरी निकायों में मल्टी स्टोरी […]

विभाग की ओर से कई बार आवास के लिए जगह उपलब्ध कराने के लिए लिखे जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है. दरअसल, प्रधानमंत्री हाउस फॉर ऑल में कई घटकों के माध्यम से 2022 तक सभी गरीबों को घर मुहैया कराने के लक्ष्य को लेकर काम किये जा रहे हैं.
इसमें एक घटक है कि जिन शहरी गरीबों के पास जमीन नहीं है. उन्हें सरकारी जमीन में पीपीपी मोड पर मल्टी स्टोरी भवन बनाकर रहने को मकान उपलब्ध कराना है. विभाग के माध्यम से जिलों को जमीन उपलब्ध करानी है व स्थानीय नगर निकाय को निर्माण करवाना है. मगर, जमीन का अभाव गरीबों को घर देने में बाधक बना रहा है.
राज्य में एक लाख से अधिक बनाने थे भवन
नगर निगम व आवास बोर्ड की जमीन पर बनेगी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग
नगर विकास व आवास मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा कि बीते वर्षों में जमीनविहीन लोगों को घर देने के काम तेजी से नहीं हो पाया है. इसमें इस वित्तीय वर्ष में राज्य के 12 नगर निगम व आवास बोर्ड की जमीनों को चिह्नित कर मल्टी स्टोरी भवन बनाने का काम किया जायेगा. मुख्य सड़कों वाली जमीन पर दुकानें भी बनेंगी. योजना है कि पांच से छह लाख में एक छोटा फ्लैट उपलब्ध करा दिया जाये.
इसमें 2.37 लाख की राशि प्रधानमंत्री आवास योजना से व शेष राशि काफी कम ब्याज पर लोगों को मिल जायेगी. स्मार्ट सिटी में भी आवास निर्माण के लिए फंड मिला है. इसके तहत पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर व बिहारशरीफ में दस हजार से अधिक घर बनाने की योजना है.
महज 5% व्यक्तिगत आवास पूरे
ऐसा नहीं की केवल सामूहिक आवास का मामला पीछे चल रहा है. शहरी निकाय गरीबों के व्यक्तिगत आवास निर्माण कराने में भी काफी पीछे है. इस योजना के अनुसार वर्ष 2022 तक करीब पांच लाख से अधिक आवास बनाने के लक्ष्य रखे गये हैं. मगर, उस योजना की रफ्तार भी तेज नहीं है. वर्ष 2014 से चल रही योजना में अब तक मात्र 25 हजार घरों के निर्माण पूरे किये जा सके हैं. इसके अलावा अभी दो लाख 77 हजार निर्माण की योजनाएं स्वीकृत हुई है. इसमें एक लाख 25 हजार घरों के काम चल रहा है.
वर्ष 2019-20 के लिए 19 करोड़ 64 लाख 46 हजार रुपये की राशि स्वीकृत है.