पटना : नगर निगम पर एक लाख का जुर्माना

निगम को लगायी फटकार पटना : पटना हाइ कोर्ट ने मौर्य लोक स्थित कीओस्क का लीज रहने के बावजूद उसे तोड़े जाने पर पटना नगर निगम को कड़ी फटकार लगते हुए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. अदालत ने जुर्माने की राशि को तीन माह के भीतर कीओस्क मालिक को देने का निर्देश पटना […]

निगम को लगायी फटकार
पटना : पटना हाइ कोर्ट ने मौर्य लोक स्थित कीओस्क का लीज रहने के बावजूद उसे तोड़े जाने पर पटना नगर निगम को कड़ी फटकार लगते हुए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.
अदालत ने जुर्माने की राशि को तीन माह के भीतर कीओस्क मालिक को देने का निर्देश पटना नगर निगम को देते हुए कहा कि जुर्माने की राशि को दोषी निगम कर्मियों से वसूल किया जाये. इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इस बात की भी छूट दी कि वह कीओस्क तोड़े जाने से हुए क्षति पूर्ति के लिए सक्षम न्यायालय में अलग से मुकदमा दायर कर सकता है. न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की एकलपीठ ने कीओस्क मालिक की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 63 वर्गफीट कीओस्क का लीज 1989 में 11 वर्षों के लिए किया गया था.
लीज समाप्त होने के पूर्व 11- 11 वर्षो के लिए लीज आगे बढ़ाया जाता रहा. इसी प्रकार 2011 में लीज को 11 वर्षों के लिए दिया गया, जिसकी अवधि 2022 में समाप्त होगी. लेकिन निगम ने आठ जून को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर कीओस्क को हटाने का आदेश दिया. तोड़े जाने के लिये दिये गये नोटिस के खिलाफ हाइकोर्ट में रिट याचिका दायर की गयी. इसी बीच निगम ने 16 जून को जबरन कीओस्क को तोड़ दिया. वहीं, निगम कि ओर से कोर्ट को बताया गया कि निगम 11 वर्षों के लिए लीज नहीं करती है. निगम 66 और 99 वर्षों के लिए लीज करती है.
लेकिन भविष्य में कीओस्क को हटाने के उद्देश्य से ही 11 वर्षो के लिए लीज किया गया. निगम के वकील का कहना था कि कीओस्क ने लीज डीड में दिये गये जगह से ज्यादा जगह का इस्तेमाल कर अतिक्रमण कर लिया था जिसे हटाने के लिए निगम ने कई बार मौखिक तथा लिखित सूचना दी थी.
इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया जिस कारण मौर्य लोक में यातायात बाधित हो रहा था. कोर्ट ने निगम कि ओर से दी गयी हर दलील को नामंजूर करते हुए कहा कि निगम ने कानून को नजर अंदाज कर कार्रवाई किया है .अपने ही लीज डीड को नहीं मान कार्रवाई की है. कोर्ट ने तोड़े गये कीओस्क को फिर से निर्माण करने की छूट आवेदक को दिया है.

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