मां ! आखिर मेरा क्या कसूर था

नागेश्वर कॉलोनी : डिब्बे में बंद कर फेंका मिला पांच माह का भ्रूण पटना : आधुनिक समाज में जहां अभिभावक एक बच्चे के लिए भगवान की चौखट से लेकर आइवीएफ अस्पतालों की दौड़ लगाते नहीं थकते, उसी समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो कोख में पलने वाले मासूम की हत्या करने से भी […]

नागेश्वर कॉलोनी : डिब्बे में बंद कर फेंका मिला पांच माह का भ्रूण
पटना : आधुनिक समाज में जहां अभिभावक एक बच्चे के लिए भगवान की चौखट से लेकर आइवीएफ अस्पतालों की दौड़ लगाते नहीं थकते, उसी समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो कोख में पलने वाले मासूम की हत्या करने से भी नहीं डरते. बुधवार को एक ऐसी ही कलयुगी मां की करतूत शहर के वीआइपी बोरिंग रोड के नागेश्वर कॉलोनी में देखने को मिली, जहां महज पांच माह के भ्रूण प्लास्टिक के डिब्बे में बंद कॉलोनी की सड़क किनारे फेंका मिला.
सफेद प्लास्टिक के डिब्बे से बाहर झांकता उसका चेहरा मानो पूछ रहा था – मां! मेरा क्या कसूर? अहले सुबह जब आस-पास के लोगों की नजर इस पर पड़ी तो पुलिस को सूचना दी गयी. इसके बाद पुलिस ने भ्रूण को अपने कब्जे में लेते हुए पीएमसीएच प्रशासन को सौंप दिया. बुद्धा कॉलोनी थानाध्यक्ष रविशंकर सिंह ने बताया कि देखने से यह पांच-छह महीने का गर्भ लग रहा है. शरीर की बनावट से स्पष्ट है कि भ्रूण लड़की का है.
बेटी होने की सजा या कुछ और !
डिब्बे में बंद इस भ्रूण को लेकर मुहल्ले में तरह-तरह की चर्चाएं रही. लोग आश्चर्यचकित थे कि आखिर एक मां अपने दिल के टुकड़े को डिब्बे में बंद कर कैसे फेंक सकती है? डॉक्टरों का मानना है कि पांच या छह महीने के भ्रूण का गर्भपात नहीं कराया जा सकता. संभवत: किसी नर्सिंग होम या अस्पताल में ऑपरेट करने के बाद भ्रूण निकाल यहां लाकर फेंके जाने की संभावना है.
हालांकि भ्रूण फेंके जाने की मजबूरी को लेकर भी चर्चाएं रहीं. थानाध्यक्ष के मुताबिक भ्रूण के लड़की होने की वजह से ऐसी संभावना है कि उसे बेटी होने की सजा मिली. लेकिन, इस तरह से फेंकने पर यह भी संभावना जतायी जा रही है कि किसी युवती ने समाज में अपने को बदनामी से बचाने के लिए नवजात की बलि दे दी. नागेश्वर कॉलोनी इलाके में कई गर्ल्स हॉस्टल भी संचालित हैं.
लड़का-लड़की में फर्क कहां : डॉ बिंदा
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ बिंदा सिंह कहती हैं कि पांच माह केभ्रूण को यूं सड़क पर फेंका जाना बहुत ही अफसोसजनक है. लड़का-लड़की में अब फर्क कहां रहा. हालांकि उन्होंने इस घटना के पीछे अनवांटेड चाइल्ड होने की आशंका भी जाहिर की. डॉ बिंदा ने कहा कि कोख में पलने वाले बच्चे के साथ मां इमोशनल रूप से जुड़ी होती है. उसको इस तरह सड़क पर फेंक दिया जाना क्राइम से कम नहीं. यह दिखाता है कि हम कितने अमानवीय होते जा रहे हैं. ऐसी घटनाएं पहले भी होती थी, लेकिन अब कुछ मामलों में यह फैशन भी हो चला है.

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