पटना : 30% महिलाओं को गॉल ब्लाडर में पथरी

पटना : गॉल ब्लाडर की पथरी के बारे में पता चलने के तुरंत बाद ऑपरेशन करना जरूरी नहीं है. लेकिन पेट में मामूली दर्द, हाजमा खराब होना, गैस ज्यादा बनने, उलटी आने या बुखार चढ़ने जैसे लक्षणों के बावजूद ऑपरेशन में देरी करना जानलेवा भी हो सकता है. इन दिनों दूरबीन तकनीक से पथरी का […]

पटना : गॉल ब्लाडर की पथरी के बारे में पता चलने के तुरंत बाद ऑपरेशन करना जरूरी नहीं है. लेकिन पेट में मामूली दर्द, हाजमा खराब होना, गैस ज्यादा बनने, उलटी आने या बुखार चढ़ने जैसे लक्षणों के बावजूद ऑपरेशन में देरी करना जानलेवा भी हो सकता है. इन दिनों दूरबीन तकनीक से पथरी का ऑपरेशन हो रहा है. इससे मरीजों को दर्द भी नहीं होता और बहुत छोटा चीरा लगा कर पथरी निकाल दी जाती है.
यह कहना है कोलकाता से आये डॉ सत्यदेव दास गुप्ता का. शनिवार को आइजीआइएमएस में गॉल ब्लाडर की पथरी, आधुनिक इलाज व बचाव पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया. आइजीआइएमएस के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग व एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में रांची से आये डॉ सतीश ने कहा कि पथरी पित्त से फिसल कर पित्त की नली में फंस कर पित्त का रास्ता रोक देती है. इससे मरीज की आंखें त्वचा व पेशाब पीला व शौच का रंग सफेद हो जाता है और थोड़ी-सी चोट पर भी बहुत ज्यादा रक्त बहता है.
इसकी अनदेखी नहीं करें और तुरंत पेट रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें आइजीआइएमएस गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के हेड डॉ मनीष मंडल ने कहा कि इन दिनों यह बीमारी तेजी से आगे बढ़ रही है. पुरुषों की तुलना में महिलाएं भी इसकी चपेट में अधिक हैं. 10 में से तीन महिलाओं को यह बीमारी होती है, जबकि पूरे बिहार में करीब 30 प्रतिशत ऐसी महिलाएं हैं, जिनको गॉल ब्लाडर की पथरी है.
उन्होंने कहा कि खान-पान में गड़बड़ी, मासिक समय पर नहीं आना, अधिक व्रत व खाली पेट रहना व पानी में गड़बड़ी आदि के कारण महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आ रही हैं. ऐसे में महिलाएं हरी सब्जियां अधिक खाएं व कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने नहीं दें. पीएमसीएच सर्जरी विभाग के हेड डॉ एनपी नारायण व एम्स पटना के डॉ राजीव रंजन ने कहा कि गॉल ब्लाडर में पथरी का पता अल्ट्रासाउंड से लगाया जा सकता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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