बिल्डिंग बाइलॉज में संशोधन की तैयारी
केंद्र और एनजीटी से सरकार करेगी अनुरोध
पटना : राज्य में बिल्डिंग बाइलॉज 2014 में संशोधन की तैयारी की जा रही है. नगर विकास व आवास विभाग द्वारा तैयार बिल्डिंग बाइलाॅज 2014 की समीक्षा मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में की गयी. इस बाइलाॅज से नदियों के किनारे राज्य के नगर निकायों में नक्शा पास करने में बड़ी बाधा पैदा हो रही है. बाइलॉज में संशोधन के बाद ही नदी के तटों पर बसे शहरों में भवनों के निर्माण में तकनीकी अड़चनों को दूर किया जा सकता है. बैठक में जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह नदी तट को लेकर एक समग्र रिपोर्ट तैयार कर नगर विकास एवं आवास विभाग को उपलब्ध कराये. इस आधार पर केंद्र सरकार व एनजीटी से अनुमोदन प्राप्त किया जा सके.
मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बिल्डिंग बाइलॉज की उपविधि-22 को लेकर विमर्श किया गया. इस उपविधि में नदी के सामने की भूमि के निकट होनेवाले निर्माण के प्रावधानों में संशोधन पर विचार किया गया. बिहार बिल्डिंग बाइलाॅज 2014 में जल संसाधन विभाग द्वारा गंगा तट या अन्य नदियों के किनारे बसे शहरों
में भवनों के निर्माण को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गयी है. उसमें यहकहा गया है कि गंगा तट से 200 मीटर तक किसी भी भवन का न तो निर्माण किया जा सकता है और न ही पुराने भवनों का जीर्णोद्धार किया जा सकता है. बाइलॉज में यह भी कहा गया है कि गंगा या नदियों का जहां तक पानी पहुंच जाता है वहां तक निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है. इसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है.
क्या है कारण
उत्तर बिहार की अधिसंख्य गंगा की उप नदियों में नेपाल की ओर से हिमालय की ऊंची शृंखला से काफी मात्रा में पानी आता है. इससे नदियों में गाद जमा होने से काफी बड़ा क्षेत्र प्रभावित होता है. इसे लेकर भारत सरकार की अधिसूचना के प्रावधान के अनुसार करीब पूरे उत्तर बिहार में कभी कोई निर्माण कार्य ही नहीं हो पायेगा.
साथ ही गंगा नदी के किनारे सटे हुए बहुत प्राचीन व ऐतिहासिक शहर हैं. इसमें बक्सर, पटना, पटना सिटी तो मौर्यकालीन शहर हैं. इसके अलावा दानापुर, हाजीपुर, बाढ़, मुंगेर और भागलपुर जैसे शहरों में लोग पहले से ही गंगा तट के किनारे निजी जमीन पर निर्मित भवनों में रह रहे हैं. इन शहरों के भवनों के निर्माण या जीर्णोद्धार पर प्रभावी प्रतिबंध युक्तिसंगत नहीं है. गंगा नदी व इसकी उप नदियों के दियारा क्षेत्रों तथा पटना के सुरक्षा बांध के भीतर पुराने गांव पहले से स्थित हैं.
