पटना : बिहार महिला आयोग ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिख कर महिला थाने और एक आवेदिका की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की है. इसके साथ ही 15 दिनों के अंदर प्रोग्रेस रिपोर्ट भी मांगा है.
गौरतलब है कि आयोग को एक शिकायत मिली थी. शिकायत में एक महिला ने कहा कि उनके पति को जानबूझ कर फंसाया जा रहा है. पति बिहार के बार नौकरी करते हैं. इस कारण सात जुलाई को महिला थाने की ओर से बुलायी गयी काउंसेलिंग में वह नहीं आ पाये. सात जुलाई को मैं अपनी सास के साथ उपस्थित हुई और अगली तिथि की मांग की, लेकिन तिथि नहीं मिली. बाद में पता चला कि काउंसेलिंग के दिन ही शाम छह बजे महिला थाने ने उसने पति पर रेप का केस दर्ज कर दिया है. वहीं आयोग ने कहा कि जब रेप का मामला पहले थे था तो काउंसेलिंग के लिए क्यों बुलाया गया.
महिला थाने की एसआइ लिपि सिंह ने बताया कि एक गर्दनीबाग थाने क्षेत्र की एक महिला ने अपने भैसुर पर छेड़खानी के साथ अन्य कई आरोप लगायी थी. आरोप की जांच करने के लिए ही काउंसेलिंग के लिए बुलाया गया था. परिवार के लोग जब शिकायत करते हैं तो देखना पड़ता है कि शिकायत झूठी तो नहीं है. इस कारण काउंसेलिंग के लिए बुलाया गया था. हालांकि आयोग का कहना है कि रेप के केस में तुरंत एफआइआर होनी चाहिए काउंसेलिंग के बाद एफआइआर दर्ज करना संदिग्धता को दर्शाता है. इसमें शिकायत करने वाली महिला और महिला थाने की संलिप्ता की जांच होनी चाहिए.
