मसौढ़ी के लोगों ने कायम की मिसाल, खोदे तालाब तो 25 फुट पर मिलने लगा पानी

अनिकेत त्रिवेदी पटना : मसौढ़ी प्रखंड जिला ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए जल संरक्षण का एक बेहतर उदाहरण बन कर उभरा है. बीते पांच वर्षों में प्रखंड के लोगों ने निजी जमीन पर मनरेगा से लेकर मत्स्य कार्यालय के माध्यम से चल रही विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा कर विभिन्न पंचायतों में 400 […]

अनिकेत त्रिवेदी
पटना : मसौढ़ी प्रखंड जिला ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए जल संरक्षण का एक बेहतर उदाहरण बन कर उभरा है. बीते पांच वर्षों में प्रखंड के लोगों ने निजी जमीन पर मनरेगा से लेकर मत्स्य कार्यालय के माध्यम से चल रही विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा कर विभिन्न पंचायतों में 400 से अधिक तालाब बनाये, जिसका असर अब दिखने लगा है.
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, गर्मी के दिनों में कभी सामान्य से 100 फुट तक नीचे चले जाने वाला मसौढ़ी प्रखंड का भू-जल ना केवल थमा है, बल्कि प्रखंड की शाहाबाद पंचायत में भू-जल अब 25 फुट के आसपास रहने लगा है. दरअसल, मनरेगा के तहत जिला ग्रामीण विकास एजेंसी की ओर से एक रिपोर्ट तैयार की गयी है.
इसमें मनरेगा और मत्स्य विभाग की मदद से खुदवाये गये तालाब के बहुद्देशीय फायदे की जानकारी दी गयी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एक तालाब खुदवाने के लिए ग्राम सभा से योजना को पारित कराना पड़ता है. इसके बाद निजी जमीन पर तालाब खुदवाने के लिए औसतन एक लाख 95 हजार की राशि खर्च योजना के माध्यम से उपलब्ध करायी जाती है. इसके बाद तालाब का काम सिंचाई से लेकर मछली पालन में किया जा सकता है. एक किसान को एक तालाब से मछली पालन कर तीन माह में ही लगभग 60 से 70 हजार रुपये आमदनी हो रही है.
तालाब बनाने के फायदे
– मत्स्य पालन से बढ़ी आमदनी.
– भू-जल का बढ़ने लगा स्तर.
– किसानों को मिली सिंचाई की वैकल्पिक सुविधा.
– एक वर्ष में एक से डेढ़ लाख तक की औसत कमाई.
– तालाब के चारों ओर पौधरोपण से पर्यावरण संरक्षण व आमदनी में वृद्धि.
कई पंचायतों में बनाये गये तालाब
रिपोर्ट में मसौढ़ी प्रखंड की शाहाबाद पंचायत की केस स्टडी की गयी है. इसमें खरौना गांव के किसान मनोज कुमार को मॉडल के रूप में लिया गया है. इसके अलावा सुपहली में 20, खंराट में चार, बसौर में पांच, तिनेरी में सबसे अधिक 28, जगदीशपुर में 16, चकलमा में आठ और सब्दुल्लाहचक में 12 के अलावा अन्य कई पंचायतों में तालाब खुदाई का काम किया गया है.
मनरेगा व मत्स्य विभाग की योजनाओं को लेकर जल संरक्षण के लिए एक साथ कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. इस माह 32 नयी योजनाएं ली गयी हैं. इनमें मनरेगा से तालाब निर्माण व मत्स्य कार्यालय से जीरा डालने और चारा देने का काम किया जाता है. मसौढ़ी प्रखंड इसके लिए बेहतर उदाहरण बन कर सामने आया है.
– डॉ0 आदित्य प्रकाश, उप विकास आयुक्त, पटना
स्थानीय युवाओं का प्रयास प्रभात खबर लाया सामने
जल एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर मसौढ़ी प्रखंड के सैकड़ों युवाओं के इस प्रयास को प्रभात खबर ने सबसे पहले बताया था. 24 जून 2019 को पृष्ठ संख्या छह पर ‘ पांच वर्षों में खुदवाये दो सौ तालाब ‘ शीर्षक से प्रकाशित खबर में प्रभात खबर ने बताया कि किस तरह दर्जनों गांवों में इन युवाओं ने न सिर्फ जल संरक्षण किया, बल्कि मछलीपालन कर लाखों रुपये की कमाई भी की.

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