पटना : पुलिस मानव तस्करों को कड़ी से कड़ी सजा दिला सकें, इसके लिए दारोगा और डीएसपी को शुरुआत में ही मानव तस्करी से जुड़े अभियान का नेतृत्व करने के टिप्स दिये जा रहे हैं. एक्सपर्ट के द्वारा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने से लेकर गवाही सुनिश्चित कराने के लिए व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी जा रही है. बिहार पुलिस अकादमी राजगीर में ट्रेनिंग ले रहे 135 डीएसपी और 360 सब इंस्पेक्टरों को मानव तस्करी के मामलों की विशेष ट्रेनिंग दी गयी है. बिहार में मानव तस्करी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. वर्ष 2017 से फरवरी 2019 तक 258 केस रजिस्टर्ड हुए.
वहीं, 1136 लोगों को मानव तस्करी के चंगुल से बचाया जा चुका है. पुलिस ने 693 तस्करों को भी पकड़ा है. इससे पूर्व वर्ष 2011 से नवम्बर 2016 तक रेस्क्यू दल द्वारा 1742 लोगों को बचाया गया था. इसमें 1001 पुरुष एवं 741 महिलाएं थीं.
मानव तस्करी के दोषी 1287 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. बिहार पुलिस अकादमी में पुलिस अफसरों को ट्रेनिंग देने वाले एक्सपर्ट सुरेश कुमार का कहना है कि पुलिस को मानव तस्करी को लेकर अपनी समझ बढ़ानी होगी. पुलिस अब भी बालश्रम से जुड़े मामलों में वह गंभीरता नहीं दिखाती. बिहार में इसी क्षेत्र में सबसे अधिक मानव तस्करी हो रही है. रेस्क्यू के बाद विधिक कार्यवाही के लिए भी सजग होना होगा.
राज्य में मानव तस्करी रोकने एवं पीड़ितों के पुनर्वास के लिए 12 दिसंबर, 2008 से अस्तित्व नामक योजना बनायी गयी थी. राज्यस्तरीय मानव तस्करी विरोधी समन्वय समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी मुख्य सचिव काे दी गयी थी. मानव तस्करी विरोधी अभियोजन अनुश्रवण समिति महानिदेशक की अध्यक्षता में गठित की गयी थी. सभी जिलों में भी मानव तस्करी विरोधी समन्वय समिति का गठन किया गया. इसका अध्यक्ष डीएम होते हैं. प्रचार-प्रसार के बिना योजना भी उतनी प्रभावी नहीं हुई, जितनी हो सकती थी.
